भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) दिसंबर में अपने पहले गगनयान परीक्षण मिशन को लॉन्च करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस बात की पुष्टि इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने की।
यह घोषणा अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षु ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने मीडिया से बातचीत के दौरान की। उन्होंने कहा कि देश अब मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए पूरी तरह तैयार है और यह केवल इसरो का नहीं बल्कि पूरे भारत का सामूहिक प्रयास है।
“अगर मैं जा सकता हूँ, तो आप भी जा सकते हैं” – शुक्ला
शुभांशु शुक्ला ने हाल ही में संपन्न Ax-4 मिशन के अपने अनुभव साझा करते हुए कहा,
“मैंने कभी सोचा नहीं था कि मैं अंतरिक्ष में जाऊँगा। अगर मैं कर सकता हूँ, तो आप सब भी कर सकते हैं। हमारे पास गगनयान होगा, भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन होगा और कई मिशन की श्रृंखला भी होगी।”
उन्होंने अंतरिक्ष से भारत को देखते हुए प्रसिद्ध पंक्ति “सारे जहाँ से अच्छा” का उल्लेख किया और कहा कि मानव अंतरिक्ष उड़ान से जो ज्ञान और अनुभव मिलता है, वह गगनयान मिशन के लिए अमूल्य होगा।
बच्चों में उत्साह और वैज्ञानिक सोच
शुक्ला ने बताया कि जब उन्होंने बच्चों से अंतरिक्ष से संवाद किया, तो उनमें अपार उत्साह और जिज्ञासा देखने को मिली।
“हर बातचीत में एक बच्चा ज़रूर पूछता था – मैं अंतरिक्ष यात्री कैसे बन सकता हूँ? यही सबसे बड़ी जीत है।”
उन्होंने कहा कि Ax-4 मिशन के दौरान अंतरराष्ट्रीय सहयोग ने यह दिखा दिया कि अंतरिक्ष कितना एकजुट करने वाला माध्यम है।
भारत की बड़ी योजनाएँ
गगनयान के साथ ही भारत ने भविष्य के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए हैं –
- भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन (Bharatiya Antariksh Station)
- 2040 तक चंद्रमा पर उतरने का लक्ष्य
ग्रुप कैप्टन पी. बालकृष्णन नायर, जो गगनयान के एक अन्य अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षु हैं, ने कहा –
“यह कोई छोटा लक्ष्य नहीं है, लेकिन हमारा समय आ चुका है। भारत मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए पूरी तरह तैयार है।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान भी शुभांशु शुक्ला ने Ax-4 मिशन और गगनयान की प्रगति पर उन्हें जानकारी दी। अक्टूबर से चारों अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण दोबारा शुरू करेंगे।