सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश : वोटर लिस्ट से बाहर हुए लोग आधार कार्ड से दर्ज करा सकेंगे आपत्ति

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि बिहार में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, वे आवश्यक फॉर्म के साथ आधार कार्ड या फॉर्म-6 में बताए गए 11 दस्तावेजों में से किसी एक को जमा कर आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि लोग या बूथ लेवल एजेंट (BLA) ऑनलाइन आपत्ति दर्ज कर सकते हैं और इसके लिए भौतिक दस्तावेज़ देना अनिवार्य नहीं होगा। वहीं, अगर फॉर्म ऑफ़लाइन जमा किया जाता है तो बूथ लेवल अधिकारी को उसकी स्वीकृति रसीद देना अनिवार्य होगा।

कोर्ट ने राजनीतिक दलों से भी अपेक्षा जताई कि वे ऐसे लोगों की मदद करें जिन्हें वोटर लिस्ट से बाहर कर दिया गया है। कोर्ट ने आश्चर्य जताया कि अब तक BLAs की ओर से केवल दो आपत्तियाँ ही दर्ज की गई हैं।

कोर्ट चुनाव आयोग (ECI) की 24 जून की अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। याचिकाकर्ता एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने तर्क दिया कि इस प्रक्रिया से लाखों नागरिकों को बिना उचित प्रक्रिया के वोट देने के अधिकार से वंचित किया जा सकता है।

वहीं, ECI ने कहा कि उसे संविधान के अनुच्छेद 324 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21(3) के तहत यह अधिकार है कि वह वोटर लिस्ट की समीक्षा कर सके।

6 अगस्त को कोर्ट को बताया गया कि 65 लाख नाम 1 अगस्त क प्रकाशित ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। हालांकि, आयोग ने आश्वासन दिया कि किसी का नाम बिना नोटिस, सुनवाई और सक्षम प्राधिकारी के आदेश के नहीं हटाया जाएगा।

14 अगस्त को कोर्ट ने आयोग को निर्देश दिया था कि हटाए जाने वाले मतदाताओं की सूची वेबसाइट पर डाली जाए। आज कोर्ट को बताया गया कि इस निर्देश का पालन किया जा चुका है।