एसिडिटी की दवा के ओवरडोज से हो सकता है गट इन्फेक्शन

 अगर आपको कभी हार्टबर्न या एसिडिटी की समस्या हो तो क्या आप भी ओमेप्राजोल  जैसी दवाएं लेते हैं? अगर हां तो सतर्क हो जाइए। हाल ही में ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) ने इस दवा के लंबे इस्तेमाल पर चेतावनी जारी की है।

यह दवा प्रोटॉन पंप इन्हिबिटर्स (पीपीआई) क्लास की है, जो पेट के एसिड को कम करके राहत देती है। लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह के इसे दो हफ्ते से ज्यादा न लें, वरना आंतों में बैक्टीरियल इन्फेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। साल 2022-23 में इंग्लैंड में 7.3 करोड़ पीपीआई प्रिस्क्रिप्शन्स जारी हुए। यानी करीब 15% आबादी  इस दवा का इस्तेमाल कर रही है। 

एनएचएस की वेबसाइट पर साफ चेतावनी दी गई है। बिना प्रिस्क्रिप्शन के ओमेप्राजोल 2 हफ्ते से ज्यादा न लें। अगर कोई परेशानी हो तो डॉक्टर से मिलें। बता दें कि यह दवा हार्टबर्न, अल्सर और गैस्ट्रो-एसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज जैसी समस्याओं के लिए दी जाती है। कई लोग इसे मामूली दव  समझकर सालों लेते रहते हैं। लेकिन लंबे समय तक इसके इस्तेमाल से पेट का एसिड कम होने पर बैक्टीरिया बढ़ सकते हैं, जो डायरिया, पेट दर्द और बुखार जैसी समस्याएं पैदा करते हैं। हालांकि सही जानकारी और कुछ सावधानियों के साथ इस खतरे से बचा जा सकता है। ओमेप्राजोल इंडिया और ब्रिटेन सहित कई देशों में सबसे ज्यादा प्रिस्क्राइब की जाने वाली दवाओं में से एक है। यह पीपीआई क्लास की दवा है, जो पेट में एसिड प्रोडक्शन को रोकती है। पेट की लाइनिंग में मौजूद प्रोटॉन पंप्स को ब्लॉक करके यह एसिड की मात्रा को कम कर देती है। इससे हार्टबर्न, अल्सर और रिफ्लक्स जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।

पेट के एसिड को न्यूट्रलाइज नहीं करती ओमेप्राजोल

 यह दवा पेट के एसिड को न्यूट्रलाइज नहीं करती है, बल्कि उसके प्रोडक्शन को ही रोकती है। इसलिए यह अल्सर के घाव को भरने में मदद करती है और रिμलक्स से फूड पाइप को बचाती है। लेकिन यह लक्षणों को दबाती है, समस्या की जड़ को नहीं सुलझाती है। अगर डाइट या लाइफस्टाइल की वजह से एसिडिटी है तो दवा के साथ बदलाव जरूरी हैं। इसलिए इसे बिना प्रिस्क्रिप्शन के लेना नुकसानदायक हो सकता है। भारत में यह दवा कई ब्रांड नामों से उपलब्ध है, जिनमें डॉ. रेड्डीज का ‘ओमेज’, जाइडस लाइफसाइंसेज का ‘ल्यूसिड’, एल्केम लैबोरेटरीज का ‘ओमी’ और सिप्ला का ‘लोमैक’ शामिल हैं। यह ओमेप्राजोल कैप्सूल आईपी जैसे जेनेरिक फॉर्म में भी उपलब्ध है। एनएचएस की मुख्य वॉर्निंग लंबे इस्तेमाल पर केंद्रित है।