टाइगर स्टेट पर 2027 में आएगी फाइनल रिपोट

अगले साल जुलाई 2027 में बाघ दिवस पर बाघ आकलन की रिपोर्ट आएगी। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इसमें एक बार फिर मप्र टाइगर स्टेट का दर्जा बचाने में सफल रहेगा। हर बार इस दिन रिपोर्ट जारी की जाती रही है। हालांकि तब प्राथमिक रिपोर्ट ही जारी होगी, विस्तृत रिपोर्ट आने में और एक से डेढ़ वर्ष लग जाएंगे। वनाधिकारियों का कहना है कि बाघ आंकलन की प्रक्रिया बहुत जटली है, इसमें कई स्तर पर साक्ष्य जुटाने पड़ते हैं। सभी साक्ष्यों का अध्ययन बड़ी चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया होती है, फिर उसे दूसरे अन्य साक्ष्यों से मिलान करना पड़ता है। प्रदेश में बाघों के लिए सबसे अच्छे और अनुकूल रहवास स्थल है। इसमें बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के जंगल सबसे आगे रहे हैं, जिसकी पुष्टि भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून भी अपनी विभिन्न रिपोर्टों में कर चुका है। रिजर्व की संख्या भी बढ़ी है। कुछ सामान्य वन क्षेत्रों में भी बाघों की मौजूदगी दिखाई दे रही है। एक अनुमान के अनुसार प्रदेश में 1000 से अधिक बाघ है। वहीं टाइगर स्टेट का दर्जा हासिल करने के लिए कर्नाटक जैसे राज्यों को और मेहनत करनी पड़ सकती है। अभी प्रदेश में 785 बाघ है, यह संख्या वर्ष 2022 में हुए अखिल भारतीय बाघ आकलन रिपोर्ट में सामने आई थी। अब तक इनकी संख्या बढ़कर ;1000 तक पहुंच जानी चाहिए। बाघों का आकलन करने से पहले देशभर में इसकी तैयारी की जा रही है।

अगले साल होगा बाघों का आकलन

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण इसका नेतृत्व कर रहा है। उसी के नेतृत्व में वन्यजीव संस्थान देहरादून में बीते महीने राष्ट्रीय स्तर की बैठक हो चुकी है। इसके बाद मध्यप्रदेश के पेंच टाइगर रिजर्व में कार्यशाला हुई है, जिसमें पांच राज्यों के विशेषज्ञ जुटे थे। बाघों के आकलन से जुड़ी तैयारियों को लेकर बिंदुवार चर्चा हुई और तैयारियों में की जाने वाली सुधारात्मक प्रक्रिया पर बातचीत हुई। बाघों का आकलन 2026 में होगा। एक साल बाद रिपोर्ट आएगी। यह काफी अध्ययन व सत्यापन के बाद ही जारी होती है।