“CJI पर जूता फेंकने की कोशिश: रामदास आठवले ने लगाया जातिगत भेदभाव का आरोप, SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग”

सुप्रीम कोर्ट में भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस बी आर गवई पर जूता फेंकने की कोशिश की घटना ने सभी को चौंका दिया है। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने इस घटना को निंदनीय करार देते हुए दावा किया कि यह कृत्य इसलिए हुआ क्योंकि कुछ उच्च जाति के लोग दलित समुदाय से आने वाले जस्टिस गवई के उच्च पद पर आसीन होने को स्वीकार नहीं कर पाए।

यह घटना 6 अक्टूबर को उस समय हुई जब 72 वर्षीय वकील राकेश किशोर ने सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई गवई पर जूता फेंकने का प्रयास किया। सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत हस्तक्षेप कर उन्हें रोक लिया। सीजेआई ने उदारता दिखाते हुए किशोर को छोड़ देने का निर्देश दिया था। दिल्ली पुलिस ने भी पूछताछ के बाद वकील को रिहा कर दिया।

आठवले ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह पहली बार है जब किसी मुख्य न्यायाधीश पर इस तरह का हमला करने की कोशिश हुई है। उन्होंने कहा, “जस्टिस गवई ने अपनी मेहनत और योग्यता के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। कुछ लोग उनके दलित समुदाय से होने के कारण इसे बर्दाश्त नहीं कर पा रहे। मैं मांग करता हूं कि आरोपी के खिलाफ अनुसूचित जाति और जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाए।”

जस्टिस गवई ने गुरुवार को इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह और उनके सहयोगी जस्टिस के विनोद चंद्रन इस घटना से स्तब्ध थे, लेकिन उन्होंने इसे भूलने का फैसला किया है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए राकेश किशोर की सदस्यता रद्द कर दी और उनके सुप्रीम कोर्ट परिसर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया।

आरोपी वकील ने दावा किया कि वह सीजेआई की भगवान विष्णु की मूर्ति से संबंधित एक टिप्पणी से आहत थे, जिसके कारण उन्होंने यह कदम उठाया। यह घटना न केवल न्यायपालिका के सम्मान पर सवाल उठाती है, बल्कि सामाजिक समरसता पर भी गंभीर चर्चा की मांग करती है।