नई दिल्ली, एजेंसी। टाटा ग्रुप की लड़ाई सरकार तक पहुंच चुकी है, जिस कारण सबकी नजर टाटा ग्रुप में शुरू हुए कलह पर आकर टिक गई है। इसी समस्या की चर्चा टाटा ट्रस्ट के न्यासी बोर्ड की आज हो रही बैठक में हो सकती है। यह बैठक कई दिनों से चल रहे आंतरिक मतभेदों के बाद हो रही है और रतन एन. टाटा की पहली पुण्यतिथि के ठीक एक दिन बाद हो रही है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ट्रस्टियों के एक गुट, जो कथित तौर पर चेयरमैन नोएल टाटा से असहमत थे, को बोला गया है कि वे ट्रस्टों को सही तरीके से चलाने के लिए सहयोग करें। टाटा ट्रस्ट के विवाद के केंद्र में चेयरमैन नोएल टाटा और ट्रस्टी मेहली मिस्त्री के साथसाथ ट्रस्टी प्रमित झावेरी, डेरियस खंबाटा और जहांगीर एच सी जहांगीर के बीच मतभेद है।
विवाद इस बात पर है कि ट्रस्ट के डायरेक्टर्स अपने मन से फैसला ले रहे हैं और चेयरमैन की बातें इग्नोर की ज रही हैं। कुछ ट्रस्टी प्रशासन की कड़ी निगरानी की मांग कर रहे हैं, जबकि अन्य का मानना है कि अत्यधिक जांच-पड़ताल से अध्यक्ष का अधिकार कमजोर हो सकता है और निर्णय लेने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है।
उम्मीद की जा रही है कि टाटा ट्रस्ट के बीच विवाद जल्द से जल्द सुलझ सकता है। वहीं बोर्ड से उम्मीद की जाती है कि वह तात्कालिक शासन या बोर्ड प्रतिनिधित्व संबंधी मुद्दों के बजाय स्वास्थ्य सेवा परियोजनाओं के लिए धन आवंटन पर फोकस करेगा। टाटा संस के बोर्ड के स्ट्रक्चर में बदलाव या नॉमिनेटेड डायरेक्टर्स को बदलने का कोई प्रस्ताव नहीं है।