न्याय के लिए मंथन की हजारों साल की पंरपरा हमारी संस्कृति रही है। विक्रमादित्य जैसे महान शासक की न्यायप्रियता दो हजार साल से इस धरती को गौरवान्वित करती रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासनकाल में न्याय व्यवस्था और प्रक्रिया समृद्ध हो रही है। हम बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं। डिजिटल और एआई के वर्तमान दौर में भी न्याय की आत्मा नहीं बदलेगी। समानता, पारदर्शिता विनम्रता और समय पर न्याय की प्राप्ति की दरकार सदैव ही रहेगाी। सीएम डॉ मोहन यादव ने यह बात मध्यप्रदेश हाईकोर्ट और राज्य न्यायिक अकादमी द्वारा इंदौर के ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ करते हुए शनिवार को कही। संगोष्ठी का आयोजन डेनमार्क के पेटेंट और ट्रेडमार्क ऑफिस के सहयोग से किया गया था। ‘विकासशील क्षितिज: डिजिटल दुनिया में वाणिज्यिक और मध्यस्थता कानून की जटिलता और नवाचार’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी का उद्देश्य डिजिटल दौर में वकीलों, जजों और कानून के छात्रों में व्यापारिक कानून और विवाद सुलझाने के तरीकों को बेहतर तरीके समझना है। संगोष्ठी में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा, भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जितेन्द्र कुमार माहेश्वरी, अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, राजेश बिंदल और अरविंद कुमार के अलावा डेनमार्क से आए कई अंतरराष्ट्रीय विधि विशेषज्ञ भी शामिल हो रहे हैं।
भारत और यूरोप के बीच सहयोग
संगोष्ठी में डिजिटल तकनीक, डेटा आधारित बिजनेस और अंतरराष्ट्रीय लेन-देन के कारण कानून में कौन-कौन सी नई चुनौतियां पर मंथन के साथ भारत और यूरोप के न्यायिक सिस्टम के बीच सहयोग को बढ़ाए जाने पर भी विमर्श हो रहा है।