भारत के शुभांशु शुक्ला सहित 4 अंतरिक्ष यात्री ने भरी उड़ान, ISS की ओर Ax-04 मिशन रवाना

Shubhanshu Shukla’s Ax-04 mission departs towards ISS: कई महीनों के इंतजार और उत्साह के बाद, आज वह ऐतिहासिक क्षण आ ही गया जब भारत के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला सहित तीन अन्य अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर एक्सिओम-4 मिशन (Ax-4 Mission) ने सफलतापूर्वक उड़ान भरी. फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर के कॉम्प्लेक्स 39ए से ठीक दोपहर 12:01 बजे (भारतीय समयानुसार), स्पेसक्राफ्ट ने आसमान को चीरते हुए अपनी यात्रा शुरू की. यह उड़ान भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक मील का पत्थर साबित हुई है, क्योंकि 41 साल बाद कोई भारतीय अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से बाहर के मिशन पर निकला है.

गगनयान मिशन से Ax-04 तक: शुभांशु शुक्ला का अंतरिक्ष सफर

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के प्रतिष्ठित गगनयान मिशन का एक अभिन्न हिस्सा हैं. उनकी इसी विशेषज्ञता और अनुभव को देखते हुए इसरो ने उन्हें Ax-04 मिशन के लिए चुना है, जो उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्रदान कर रहा है. शुभांशु शुक्ला उत्तर प्रदेश के लखनऊ से संबंध रखते हैं, जहाँ उनका जन्म 10 अक्टूबर 1985 को हुआ था.

उन्होंने जून 2006 में भारतीय वायुसेना (IAF) की फाइटर विंग में अपनी सेवाएँ शुरू कीं. शुभांशु एक कॉम्बैट लीडर और अत्यंत अनुभवी परीक्षण पायलट के रूप में 2000 घंटों से अधिक का उड़ान अनुभव रखते हैं. वायुसेना में रहते हुए, उन्होंने सुखोई-30, मिग-21, मिग-29, जगुआर, हॉक, डॉर्नियर और एन-32 जैसे विभिन्न प्रकार के लड़ाकू विमान सफलतापूर्वक उड़ाए हैं, जो उनकी बहुमुखी प्रतिभा और असाधारण कौशल का प्रमाण है.

रूस में विशेष प्रशिक्षण और PM मोदी की घोषणा

अंतरिक्ष यात्रा के लिए शुभांशु शुक्ला ने 2019 में रूस की राजधानी मॉस्को स्थित प्रसिद्ध यू.री गगारिन कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर से एक साल का गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया था. उनकी योग्यता और कड़ी मेहनत का ही परिणाम था कि 27 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं गगनयान मिशन के लिए चुने गए अंतरिक्ष यात्रियों में शुभांशु शुक्ला के नाम की घोषणा की थी, जिससे उन्हें देश भर में पहचान मिली.

शभांशु का उत्साह और युवाओं के लिए प्रेरणा

Ax-04 मिशन को लेकर शुभांशु शुक्ला का उत्साह चरम पर है. 1984 के बाद वह पहले ऐसे भारतीय होंगे, जो अंतरिक्ष में कदम रखने जा रहे हैं, जिससे यह यात्रा उनके लिए और भी खास हो जाती है. Ax-04 मिशन ने शुभांशु का एक वीडियो यूट्यूब पर साझा किया है, जिसमें उनकी खुशी और उत्साह साफ झलक रहा है. वीडियो में शुभांशु ने साझा किया, “मुझे फ्लोरिडा आने से ठीक 1 हफ्ते पहले ही पता चला था कि मैं Ax-04 मिशन का हिस्सा बनने जा रहा हूँ. मैं इस मिशन के लिए बेहद उत्सुक था. मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था क्योंकि पहली बार मुझे अंतरिक्ष में उड़ान भरने का मौका मिला था. उस समय मुझे समझ नहीं आया कि मैं कैसे रिएक्ट करूँ!”

शुभांशु शुक्ला का कहना है कि यह सफर उनके लिए बेहद खास होने वाला है. उनका मानना है कि यह ऐसा समय है जब व्यक्ति को यह अहसास होता है कि वह किसी बड़ी चीज का हिस्सा बनने जा रहा है. उन्होंने खुद को बहुत भाग्यशाली बताते हुए कहा कि इस सफर के माध्यम से वे भारत के युवाओं के लिए एक मिसाल कायम करने की कोशिश करेंगे. उनका लक्ष्य बच्चों में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति उत्सुकता पैदा करना है. उनके शब्दों में, “अगर मेरी कहानी से किसी एक शख्स की जिंदगी में भी बदलाव आता है तो यह मेरे लिए सबसे बड़ी सफलता होगी.”

Ax-04 कमांडर ने की शुभांशु की सराहना

Ax-04 मिशन की कमांडर पैगी व्हिटसन ने शुभांशु की काबिलियत की भरपूर सराहना की है. उन्होंने कहा, “ड्रैगन कैप्सूल में शुभांशु को अपने पायलट के रूप में पाना खुशी की बात है. शुभांशु को ऑपरेशन का अच्छा-खासा अनुभव है. खासकर जब तकनीक की बात आती है तो उनसे बेहतर कोई नहीं है.” यह टिप्पणी शुभांशु के तकनीकी ज्ञान और परिचालन दक्षता को उजागर करती है.

Ax-04 मिशन में शामिल अन्य सदस्य

शुभांशु शुक्ला के साथ, पैगी व्हिटसन, स्लावोश उजनांस्की-विस्निएवस्की, और टिबोर कपु भी Ax-04 मिशन का हिस्सा हैं. यह मिशन इसरो, नासा, Axiom स्पेस और स्पेसएक्स का एक साझा प्रयास है, जिसके तहत ये चारों अंतरिक्ष यात्री अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में विभिन्न प्रकार के वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे, जिससे अंतरिक्ष अनुसंधान में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा.

स्पेसएक्स का शक्तिशाली फाल्कन 9 रॉकेट और अत्याधुनिक ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट इन चारों अंतरिक्ष यात्रियों को ISS तक ले जाएगा. उम्मीद है कि ये सभी कल यानी 26 जून 2025 की शाम 4:30 बजे (अमेरिकी समयानुसार सुबह 7 बजे) तक ISS पर सुरक्षित रूप से पहुँच जाएँगे. यह मिशन भारत के लिए अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में एक और मील का पत्थर साबित होगा.