Reduced Infant Mortality Rate In MP: हाल ही में आई रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश में हर 1 हजार नवजात शिशुओं में 40 अपनी जान गवा रहे जो पूरे देश में सबसे ज्यादा है। मध्य प्रदेश देश में सबसे पीछे है मातृ और शिशु स्वास्थ्य के मामले। ये मौतें सबसे ज्यादा उन परिवारों में हो रही हैं जो समय पर इलाज नहीं करा पा रहे हैं सुविधा और पैसे के अभाव के कारण। कई अस्पतालों में तो अच्छी प्रसव सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं जो मां और बच्चे की मौत का कारण बनती हैं।
2020 में ये संख्या 175 थी जो अब घट कर 159 हो गई है जो एक अच्छी बात है पर स्वास्थ सेवा में और सुधार की जरूरत है। मध्य प्रदेश की राजधानी में हुए एक कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने स्वास्थ सेवा कर्मियों को व्यवस्था में सुधार लाने और बेहतर सेवाएं देने को कहा।
आँकड़ों पर नज़र डालें
भारत सरकार की महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय द्वार 2022 में सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम की रिपोर्ट जारी की गई थी कि जिसके मुताबिक मध्य प्रदेश में शिशु मृत्यु दर 40 है। इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत की शिशु मृत्यु दर 26 है जो पिछले आंकड़ों के हिसाब से कम है। 2013 की रिपोर्ट में भारत का आईएमआर 40 था जो अब कम हुआ है। मध्य प्रदेश के पुराने आंकड़े देखे तो 2013 में आईएमआर 53 था जो 2022 में 40 हुआ। सरकार लगातार स्वास्थ सेवाओं को सुधारने की ओर कड़े और मजबूत कदम उठा रही है जिसका असर दिख रहा है।
अलग-अलग स्तर पर आईएमआर की तुलना
एसआरएस 2020 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में शिशु मृत्यु दर (शिशु मृत्यु दर – आईएमआर) औसत 28 प्रति 1,000 जीवित जन्म था। अलग-अलग राज्यों में ये अनकड़े भिन्न हैं। मध्य प्रदेश में ये सांख्य सबसे अधिक 43 दर्ज है, जबकि केरल में ये सबसे कम, मातृ 6 रही। उत्तर प्रदेश में आईएमआर 38, असम में 37, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में 36-36, राजस्थान में 33 और बिहार में 32 रही। झारखंड में यह दर 29, हरियाणा में 28, पंजाब में 22, गुजरात में 23 और पश्चिम बंगाल में 22 दर्ज हुई। महाराष्ट्र में आईएमआर 20, आंध्र प्रदेश में 23, कर्नाटक में 21, तेलंगाना में 23, और तमिलनाडु में 15 रही। उत्तर भारत के जम्मू-कश्मीर में यह दर 16, हिमाचल प्रदेश में 20, उत्तराखंड में 25, जबकि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली (एनसीटी) में 11 रही।
मौत की वजह पता नहीं सरकार की कोशिश
स्त्री रोग विशेष ने बताया कि भारत सरकार और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने मारने डेथ स्टेट रिव्यू सिस्टम बनाई है जिसकी समय समय पर बैठक होती रहती है। इस बैठक में डॉक्टर, अस्पताल की आशा कर्मचारी जैसे और भी लोग मौजूद रहते हैं। ये मीटिंग ऑन रिकॉर्ड रहती है जिससे सभी बातें और मामलों का रिकॉर्ड रहे और कोई भी चूक ना हो।
शिशु मृत्यु दर कम तो हुआ है पर अभी लक्ष्य बहुत दूर है। मध्य प्रदेश को अपनी स्थिति सुधारने की सबसे ज्यादा जरूरत है क्योंकि अगर इसी तरह मां और शिशु की मृत्यु होती रहती है तो ये स्वास्थ्य मंत्रालय पर सवाल खड़ा करता है।