मच्छरों की संख्या बढ़ने से बढ़ रहा डेंगू-चिकनगुनिया का खतरा, शहर में सीवेज सिस्टम की खुली पोल सड़कों पर जलभराव

राजधानी में नगर निगम भले ही बरसात के पहले नालों की सफाई व सीवेज सिस्टम दुरुस्त करने का दावा करे, लेकिन बरसात आते ही उनके दावों की पोल खुल गई है। शहर में लगातार हो रही बारिश से जगह-जगह जलभराव हो रहा है। जिससे आम नागरिक परेशान हैं। यहां कई इलाकों में खाली प्लॉट से लेकर सड़कों तक पानी भरा है, लेकिन देखने वाला कोई नहीं है। लोगों ने कहा कि जलनिकासी की व्यवस्था न होने से मच्छरों की संख्या बढ़ रही है। अस्पतालों में डेंगू- चिकनगुनिया के मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है।

लार्वा खोजने व नष्ट करने में लगी टीमें

स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि 44 से ज्यादा टीमें लार्वा खाजने और उसे नष्ट करने में लगी हुई हैं। अब तक दो लाख घरों का सर्वे हो चुका है। जरूरत पड़ने पर टीमों की संख्या बढ़ाई जाएगी। वहीं, नगर निगम का कहना है कि शहर में 23 गाड़ियों से फॉगिंग कराई जा रही है। इसके लिए उन्हें रूट तय करके दिए गए हैं और जीपीएस लोकेशन भी शेयर की जा रही है। बता दें कि एम्स भोपाल, बीएमएचआरसी, गांधी मेडिकल कॉलेज और जयप्रकाश चिकित्सालय में एलाइजा जांच फ्री है।

अल्पना तिराहा पर जलभराव

  • रेरा कॉलोनी ई-7 : यहां हर साल तेज बारिश के दौरा बंगलों और इमारतों में पानी भर जाता है। स्थानीय रहवासियों ने बताया कि सड़क पर भी काफी गड्ढे हो गए हैं। जिससे जलभाराव होता है। यहां जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है।
  • कोहेफिजा: स्थानी रहवासियों ने बताया कि हर जगह सड़क खराब है। इससे पानी भरा रहता है। मच्छरों के कारण कई लोग बीमार पड़ रहे हैँ। बच्चे बीमार हो रहे हैं, जिससे उन्हें स्कूल नहीं भेज पा रहे हैं।
  • कोलार रोड: यहां खाली प्लॉट पर सफाई नहीं होती और न ही इनमें लगी झाड़ियों को काटा जाता। जिस कारण यहां पानी भरता है और मच्छर पैदा होते हैं। जो मलेरिया व डेंगू जैसी बीमारी का कारण बनते हैं।
  • बागसेवनिया: यहां संजीवनी क्लीनिक के बाहर तालाब जैसे हालात हैं। रहवासियों का कहना है कि बीमार बच्चे और बुजुर्गों को अस्पताल के अंदर नहीं ले जा पा रहे हैं।