अमेरिका और भारत के बीच पिछले कुछ समय से चल रहे ‘टैरिफ वॉर’ के बीच अमेरिका ने भारत में अपने नए राजदूत की नियुक्ति की है। व्हाइट हाउस में कार्यरत और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भरोसेमंद अधिकारी माने जाने वाले सर्जियो गोर को भारत का नया राजदूत नियुक्त किया गया है। उन्हें दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के विशेष दूत की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। सर्जियो गोर, एरिक गार्सेटी की जगह लेंगे, जिनका कार्यकाल मई 2023 से जनवरी 2025 तक था। इस नियुक्ति के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या ट्रंप के ये नए दूत दोनों देशों के रिश्तों में सुधार ला पाएंगे।
‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का संकेत
सर्जियो गोर की छवि ट्रंप की ही तरह ‘अमेरिका फर्स्ट’ एजेंडे की है, जो यह दर्शाता है कि अमेरिका भारत के साथ अपने संबंधों को मुख्य रूप से व्यापारिक लेनदेन के नजरिए से देखेगा। ट्रंप की इस घोषणा के बाद उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि सर्जियो गोर भारत में अमेरिका के लिए एक शानदार राजदूत साबित होंगे। हालांकि, ट्रंप ने कई अन्य प्रमुख देशों की तुलना में भारत के लिए राजदूत की नियुक्ति देर से की।
अमेरिकी रक्षा नीति के डिप्टी सेक्रेटरी एल्ब्रिज कोल्बी ने इस नियुक्ति का स्वागत करते हुए कहा कि भारत-अमेरिका संबंध बहुत महत्वपूर्ण हैं और इस भूमिका में इतने योग्य और दूरदर्शी व्यक्ति का होना महत्वपूर्ण है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, सर्जियो गोर के पास भारत के साथ काम करने का ज्यादा अनुभव नहीं है, लेकिन उन्हें कई मायनों में एरिक गार्सेटी से बेहतर माना जाता है।
ट्रंप का शक्तिशाली संदेश
पॉलिटिको की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक अधिकारी ने बताया कि सर्जियो गोर की नियुक्ति का मकसद दोनों देशों के बीच तनाव कम करना है। राष्ट्रपति ट्रंप ने व्यक्तिगत रूप से अपने बहुत करीबी दूत को भारत भेजकर मोदी सरकार को एक शक्तिशाली संदेश दिया है। व्हाइट हाउस के पूर्व अधिकारी स्टीव बैनन ने भी इस नियुक्ति का स्वागत किया है और कहा है कि सर्जियो का कोई भी संदेश सीधे ट्रंप का आदेश माना जाएगा, जो दोनों देशों के बीच गंभीर बातचीत का संकेत है। बैनन ने बताया कि सर्जियो को भारतीय नीति से जुड़ी ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन वह चीजों को जल्दी समझते हैं और उनकी राष्ट्रपति तक सीधी पहुंच और उनका भरोसा है। यह सब भारत के लिए एक कड़ा संदेश भी है।