गाज़ा में भुखमरी: संयुक्त राष्ट्र ने कहा– मानव-निर्मित त्रासदी

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी है कि गाज़ा में फैलती भुखमरी कोई प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि एक मानव-निर्मित त्रासदी है। उन्होंने इसे नैतिक रूप से निंदनीय और पूरी मानवता की विफलता करार दिया। गुटेरेस ने कहा, “यह सिर्फ़ भोजन की कमी नहीं बल्कि जीवन के लिए ज़रूरी प्रणालियों के जानबूझकर ध्वस्त कर दिए जाने का नतीजा है।”

सितंबर तक 6.4 लाख लोग विनाशकारी स्थिति में

IPC (Integrated Food Security Phase Classification) की रिपोर्ट बताती है कि गाज़ा गवर्नरेट से शुरू हुई भुखमरी आने वाले हफ्तों में देइर अल बलाह और खान यूनुस तक फैल जाएगी। सितंबर 2025 के अंत तक लगभग 6.4 लाख लोग IPC फेज-5 (विनाशकारी स्थिति) में पहुँच जाएंगे। इसके अलावा 11 लाख से अधिक लोग फेज-4 और लगभग 4 लाख लोग फेज-3 “संकट” की स्थिति झेलेंगे।

इज़राइल पर ज़िम्मेदारी और युद्धविराम की मांग

गुटेरेस ने कहा कि कब्ज़ा करने वाली शक्ति होने के नाते इज़राइल की अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत ज़िम्मेदारी है कि वह भोजन और दवाइयों की आपूर्ति सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा, “अब और बहाने नहीं चलेंगे। कार्रवाई का समय अभी है।” संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने तत्काल युद्धविराम, मानवीय सहायता की अबाधित आपूर्ति और 7 अक्टूबर 2023 को बंधक बनाए गए सभी लोगों की रिहाई की अपील की है।

बच्चे सबसे बड़े शिकार, युद्ध अपराध का आरोप

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने बताया कि जुलाई 2025 में ही 12,000 से अधिक बच्चे तीव्र कुपोषण से ग्रस्त पाए गए, जो अब तक का सबसे बड़ा मासिक आंकड़ा है। अनुमान है कि जून 2026 तक मौत के गंभीर ख़तरे में पड़े बच्चों की संख्या 43,400 तक पहुँच सकती है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने कहा कि गाज़ा में भुखमरी सीधे तौर पर इज़राइली नीतियों का परिणाम है। उनके मुताबिक, भूख को युद्ध के हथियार के रूप में इस्तेमाल करना युद्ध अपराध है और इससे होने वाली मौतें “जानबूझकर की गई हत्याओं” की श्रेणी में आ सकती हैं।