भोपाल: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में थायराइड और मोटापे जैसी आम लेकिन गंभीर समस्याओं के इलाज के लिए नई उम्मीद जगी है। मंगलवार को शासकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज और अस्पताल परिसर में हाइपोथायरायडिज्म एवं ओबेसिटी यूनिट की शुरुआत की गई। यह पहल भारत सरकार के आयुष मंत्रालय और केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (CCRH) के संयुक्त तत्वावधान में की गई है।
यह यूनिट प्रदेश की पहली ऐसी सुविधा है जहां थायराइड ग्रंथि की अनियमितताओं और उससे होने वाले मोटापे का होम्योपैथी की सुरक्षित और असरदार दवाओं के जरिए इलाज और शोध एक साथ होगा।
विशेषज्ञ टीम करेगी इलाज और रिसर्च
नई यूनिट में CCRH द्वारा उपलब्ध कराए गए विशेषज्ञ चिकित्सक, सहायक डॉक्टर और लैब एक्सपर्ट्स की टीम तैनात की गई है। यह टीम न सिर्फ मरीजों का पंजीयन और उपचार करेगी, बल्कि थायराइड की दवाओं के लंबे उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों पर भी रिसर्च करेगी।
यूनिट का समय
- रोज सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक मरीजों का पंजीयन और इलाज।
- जानकारी के लिए फोन नंबर: 0755-2992972 और 0755-2992970 (सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक)।
- मरीजों को मिलेगा मुफ्त उपचार, दवाएं, डाइट और एक्सरसाइज पर परामर्श।
महिलाओं पर खास फोकस
यूनिट की प्रभारी डॉ. जूही गुप्ता ने बताया कि थायराइड और मोटापे की समस्या सबसे ज्यादा महिलाओं में देखने को मिलती है। समय पर इलाज न मिलने पर यह 50 साल की उम्र के बाद गंभीर हड्डी और जोड़ों की बीमारियों में बदल सकती है। गर्भावस्था के दौरान होने वाले सामान्य हार्मोनल बदलाव को भी कई बार बीमारी मानकर दवाएं दी जाती हैं, जिससे महिलाएं जीवनभर दवाओं पर निर्भर हो जाती हैं।
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसके मिश्रा ने कहा कि आजकल की तेज़ रफ्तार जिंदगी में थायराइड और मोटापा आम समस्या बन चुकी है। खासतौर पर महिलाएं इससे अधिक प्रभावित होती हैं। उन्होंने बताया कि होम्योपैथी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर लंबे समय तक स्वास्थ्य बेहतर करने में सहायक होती है।
पारंपरिक दवाओं पर निर्भरता घटाने का प्रयास
डॉक्टरों का मानना है कि थायराइड की एलोपैथिक दवाएं लंबे समय तक लेने से वजन बढ़ना, हड्डियों की कमजोरी और अन्य गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। होम्योपैथी का उद्देश्य सिर्फ बीमारी खत्म करना नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य को संतुलित और बेहतर बनाना है।
राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार की तैयारी
भोपाल के अलावा देश के पांच और शहरों में भी ऐसी यूनिट्स की शुरुआत हो चुकी है। उम्मीद है कि आने वाले समय में इस मॉडल को और राज्यों तक फैलाया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग थायराइड और मोटापे जैसी समस्याओं का प्राकृतिक और सुरक्षित इलाज पा सकें।