बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान से जुड़े 25 साल पुराने काला हिरण शिकार मामले में मंगलवा 23 सितम्बर को जोधपुर हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हो रही है। इस बहुचर्चित मामले में सलमान खान की अपील और राज्य सरकार की लीव टू अपील याचिका पर एक साथ सुनवाई हो रही है। जस्टिस संदीप शाह की अदालत में होने वाली इस सुनवाई पर पूरे देश की नजर है, क्योंकि आज का फैसला सलमान खान की सजा बरकरार रख सकता है, उन्हें राहत दे सकता है या उनकी मुश्किलें और बढ़ा सकता है।
क्या है मामला?
यह घटना 1998 की है, जब सलमान खान फिल्म ‘हम साथ साथ हैं’ की शूटिंग के लिए जोधपुर में थे। 1-2 अक्टूबर 1998 की रात को जोधपुर के कांकाणी गांव के पास दो काले हिरणों का कथित तौर पर शिकार किया गया था। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत काले हिरण एक संरक्षित प्रजाति हैं और शिकार की घटना में सलमान खान मुख्य संदिग्ध थे। उनके साथ सैफ अली खान, तब्बू, नीलम, सोनाली बेंद्रे और दुष्यंत सिंह भी थे। इस घटना के बाद, सलमान और अन्य के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। यह मामला बिश्नोई समुदाय के लिए भी संवेदनशील था, जो काले हिरण को पवित्र मानते हैं।
लोअरकोर्ट का फैसला
लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 5 अप्रैल 2018 को जोधपुर की ट्रायल कोर्ट ने सलमान खान को दोषी करार देते हुए 5 साल की कैद और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। हालांकि, सह-आरोपी सैफ अली खान, तब्बू, नीलम, सोनाली बेंद्रे और दुष्यंत सिंह को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।सजा सुनाए जाने के बाद सलमान को जोधपुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया था, लेकिन दो दिन बाद 7 अप्रैल, 2018 को उन्हें जमानत दे दी गई थी। इसके बाद सलमान ने निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट में सुनवाई
आज दो याचिकाओं पर सुनवाई होगी। पहली सलमान खान की अपील है, जिसमें उन्होंने अपनी पाँच साल की सज़ा को रद्द करने की माँग की है। उनके वकील का दावा है कि निचली अदालत का फ़ैसला तथ्यों पर आधारित नहीं है और सलमान को झूठा फँसाया गया है। दूसरा, राजस्थान सरकार की अपील अनुमति याचिका में सैफ अली खान, तब्बू, नीलम, सोनाली बेंद्रे और दुष्यंत सिंह को बरी किए जाने को चुनौती दी गई है। सरकार का तर्क है कि इन सह-आरोपियों को बरी करना गलत था और उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।