वाटर मैनेजमेंट: स्कॉडा सिस्टम पर 20करोड़ खर्च करने की तैयारी

 इस बार मानसून के पूरी तरह से मेहरबान होने के बाद शहर के आसपास की तकरीबन  सभी वाटर बॉडीज लबालब भर चुकी हैं।  अब इनके पानी का सही तरीके से मैनेजमेंट हो इस पर नगर निगम काम कर रहा है। इसके लिये राजधानी में अब वाटर मैनेजमेंट सिस्टम को 20 करोड़ की लागत से  अपडेट किया जा रहा है। इसके चलते अब न तो पानी की बर्बादी होगी न ही अनियमित सप्लाई। दरअसल, अब प्रदेश की नगरीय निकायों में अत्याधुनिक वाटर मैनेजमेंट स्कॉडा सिस्टम फेस टू को लागू करने की तैयारी की जा रही है। पहले फेस में इस पर 20 करोड़ रूपये का काम किया गया था, लेकिन उसमें केवल पानी की मॉनिटरिंग की जाती थी पर अब नये सिस्टम मे मॉनिटरिंग के साथ साथ कंट्रोलिंग भी की जा सकेगी। स्कॉडा सिस्टम की रूपरेखा स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत तैयार की गई थी। लेकिन स्मार्ट सिटी इस पर अमल नहीं कर पाया। नगर निगम ने इस प्रोजेक्ट पर तीन फेस में काम कर रहा है। भोपाल शहर में कुल 250 पानी की टंकियां हैं। निगम का दावा है कि 137 पानी की टंकियों में इस सिस्टम को लागू किया गया है। यह सिस्टम भी एक सॉफ़्टवेयर पर काम करता है।

क्या है स्कॉडा सिस्टम

 वाटर मैनेजमेंट के अत्याधुनिक तकनीक स्कॉडा सिस्टम में पानी के लीकेज पर नजर रखी जाती है। पानी की टंकियों को सेंसर उपकरणों से लैंस किया जाता है।पानी की टंकी आखिर कितनी भरी, कितनी खाली और कब तक भर सकती है यह जानकारी ऑनलाइनमिलती है। टंकी में पानी भरने और सप्लाई का प्रेशर की भी जानकारी होती है। वाटर सप्लाई में दिक्कत होने पर भी ऑनलाइनजानकारी मिल जाती है। यह है स्कॉडा सिस्टम का फायदा पानी की बबार्दी पर रोक। वाटर सप्लाई में मैनुअल वर्क के कारण कई समस्याओं का निदान। पानी सप्लाई में बाधा का तत्काल सूचना। नियमित और पर्याप्त पानी सप्लाई की डाटा समेत एक-एक जानकारी