भोपाल कैटल फ्री सिटी बनाने का दावा सिर्फ कागजों में
भोपाल: यह एक विडम्बना ही कही जाएगी कि हर साल 20 लाख से अधिक रुपए खर्च करने के बाद भी भोपाल कैटल फ्री सिटी नहीं बन पायी है। सच तो यह है कि राजधानी भोपाल की सड़क पर आवारा पशुओं ने कब्जा जमा लिया है। नगर निगम के सामने आवारा पशु इतनी बड़ी चुनौती बन गए हैं कि अफसर चाहकर भी इन शहर से बाहर नहीं कर पा रहे हैं।
शहर की सड़कों पर आवारा पशु धमा-चौकड़ी मचा रहे हैं। बीच सड़क पर रात-दिन डेरा जमाए इन पशुओं की जोर आजमाइश से कई बार हादसे हो चुके हैं।
अब तक शहर से बाहर नहीं हो पाई डेरियां
भोपाल में डेरी विस्थापन को लेकर 40 साल पहले से बन रही योजनाएं अब भी कागजों में ही हैं। आठ साल पहले इन डेरियों के लिए जमीन आवंटित करने के बाद भी नगर निगम इन्हें शहर से बाहर करने में सफल नहीं हो पाया। यह जमीन ग्राम दीपड़ी, परवलिया, अरवलिया, कालापानी, तूमड़ा, मुगालिया कोट और कालापानी में आवंटित की गई थी लेकिन उसके बाद भी यह योजना सफल नहीं हो पायी।
10 हजार से ज्यादा पशु सड़कों पर
आवारा पशुओं की पटकनी और टक्कर से शहर के कई क्षेत्रों में लोग हाथ-पैर तक टुड़वा चुके हैं। नगर निगम की अनदेखी से शहर की सड़कों पर आवारा पशु कम होने का नाम नहीं ले रहे। निगम के आकड़ों के मुताबिक शहर की सड़कों पर 10 हजार से ज्यादा आवारा पशु धूम रहे हैं, लेकिन इन्हें पकड़ा नहीं जा रहा है। निगम अमला साल भर की मशक्कत के बाद महज दो हजार मवेशियों को शहर से बाहर का रास्ता दिखा पाया है। यह स्थिति तब है, जब निगम के आवारा मवेशी पकड़ने के नाम पर अच्छा खासा बजट खर्च करता है। फिर भी शहर की मुख्य सड़कों पर मवेशियों की भीड़ लगी रहती है।