देश की राजनीति को हिला देने वाले ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ (अन्ना आंदोलन) के करीब डेढ़ दशक बाद, आंदोलन के प्रमुख चेहरे और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण का एक बड़ा बयान सामने आया है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पहली पुण्यतिथि (26 दिसंबर 2025) के अवसर पर प्रशांत भूषण ने न केवल डॉ. सिंह की तारीफ की, बल्कि उस आंदोलन का हिस्सा होने पर गहरा खेद जताया, जिसने यूपीए-2 सरकार की छवि को नुकसान पहुँचाया।
मनमोहन सिंह को बदनाम करने का अफसोस
प्रशांत भूषण ने स्वीकार किया कि अन्ना आंदोलन का सबसे बड़ा प्रतिकूल परिणाम यह हुआ कि इसकी आड़ में एक ऐसी सत्ता का उदय हुआ, जिसने देश के संवैधानिक ढांचे को चोट पहुँचाई। उन्होंने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा:
भूषण के अनुसार, उनके आंदोलन का सहारा लेकर वर्तमान शासन सत्ता में आया। उन्होंने इसे एक ‘धूर्त शासन’ (Rogue Regime) करार देते हुए कहा कि इसने देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं और मौलिक अधिकारों को अपूरणीय क्षति पहुँचाई है।
उन्होंने मनमोहन सिंह को एक विनम्र, सुशिक्षित और नेक इरादों वाला व्यक्ति बताया और दुख जताया कि उस समय डॉ. सिंह की शालीनता को उनकी कमजोरी समझ लिया गया था। हालांकि उन्होंने माना कि यूपीए-2 के समय भ्रष्टाचार (2G, कोयला घोटाला) था, लेकिन उनका दावा है कि आज का भ्रष्टाचार और फासीवाद उस दौर के मुकाबले कहीं अधिक भयावह है।
“अरविंद केजरीवाल ठीक आदमी नहीं हैं”
‘आम आदमी पार्टी’ (आप) के संस्थापकों में शामिल रहे भूषण ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। उन्होंने उस ‘झटके’ को याद किया जब उन्हें पहली बार अहसास हुआ कि केजरीवाल वैकल्पिक राजनीति के प्रति ईमानदार नहीं हैं:
भूषण ने खुलासा किया कि पार्टी गठन के समय विशेषज्ञों द्वारा बनाई गई 32 पॉलिसी कमेटियों की रिपोर्ट पर केजरीवाल ने यह कहकर रोक लगा दी थी कि “हमें किसी पॉलिसी की जरूरत नहीं है, हम राजनीतिक सुविधा के अनुसार स्टैंड लेंगे।”
भूषण ने कहा, “उसी समय मुझे समझ आ गया था कि केजरीवाल ठीक व्यक्ति नहीं हैं और वह पार्टी को उस पारदर्शी और ईमानदार दिशा में नहीं ले जाएंगे जिसका सपना हमने देखा था।”
इंटरव्यू में प्रशांत भूषण ने आंदोलन के पीछे के रणनीतिक गठजोड़ पर भी बात की:
उन्होंने आरोप लगाया कि अन्ना आंदोलन को काफी हद तक आरएसएस और भाजपा ने कांग्रेस सरकार को गिराने के लिए हवा दी थी। भूषण के मुताबिक, अन्ना हजारे शायद इससे अनजान थे, लेकिन अरविंद केजरीवाल को इसकी पूरी जानकारी थी।
भूषण ने कुमार विश्वास और अरविंद केजरीवाल दोनों को ‘राइट विंग’ विचारधारा का समर्थक बताया और कहा कि वैकल्पिक राजनीति देने के नाम पर बनी पार्टी अब अन्य पारंपरिक दलों जैसी ही स्वार्थी हो गई है।
राजनीति में ‘वैकल्पिक मॉडल’ की विफलता
प्रशांत भूषण का मानना है कि जिस ‘ईमानदार राजनीति’ की उम्मीद के साथ ‘आप’ का जन्म हुआ था, केजरीवाल के ‘अनैतिक’ तौर-तरीकों ने उसे पूरी तरह नष्ट कर दिया है। उन्होंने अफ़सोस जताते हुए कहा कि वे अनजाने में एक ऐसे ‘फ्रेंकस्टीन मॉन्स्टर’ को बनाने में मदद कर बैठे जिसने अंततः लोकतंत्र को ही कमजोर किया।