अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में राजस्थान ने एक नया स्वर्णिम अध्याय लिखते हुए देश के शीर्ष पायदान पर कब्जा कर लिया है। 31 दिसंबर 2025 तक जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता 35,000 मेगावाट के पार पहुँच गई है। इसी के साथ भारत की कुल सौर ऊर्जा क्षमता में अकेले राजस्थान की हिस्सेदारी अब 27 प्रतिशत हो गई है, जो राज्य को देश के ‘सोलर पावरहाउस’ के रूप में मजबूती से स्थापित करती है।
दो साल में दोगुनी हुई रफ्तार
राज्य सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक, बीते दो वर्षों में प्रदेश ने सौर ऊर्जा उत्पादन में अभूतपूर्व छलांग लगाई है। इस संक्षिप्त अवधि में स्थापित क्षमता में 18,000 मेगावाट से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। यदि भूमि पर स्थापित (Ground Mounted) सौर संयंत्रों की बात करें, तो देश की कुल 1 लाख मेगावाट क्षमता में से अकेले राजस्थान का योगदान 31,000 मेगावाट है। राजस्थान की इस सफलता का मुख्य श्रेय यहाँ के विशाल रेगिस्तानी भू-भाग और साल के 320 से अधिक दिनों तक मिलने वाली प्रखर धूप को जाता है।
छतों पर ‘बिजली क्रांति’
रूफटॉप सोलर के क्षेत्र में भी राजस्थान देश के टॉप-5 राज्यों में शामिल हो गया है। पीएम सूर्यघर योजना के तहत प्रदेश में अब तक 1,20,162 संयंत्र लगाए जा चुके हैं।
- बड़ी राहत: केंद्र सरकार अब तक उपभोक्ताओं के खातों में 824 करोड़ रुपये की सब्सिडी सीधे ट्रांसफर कर चुकी है।
- राज्य का अतिरिक्त बोनस: घरेलू उपभोक्ताओं को सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु राज्य सरकार ने केंद्र की ₹78,000 की सब्सिडी के अतिरिक्त ₹17,000 की राज्य सब्सिडी देने की घोषणा की है। इस तरह पात्र उपभोक्ताओं को कुल ₹95,000 तक की सहायता प्राप्त होगी।
- निशुल्क बिजली: राज्य सरकार की 150 यूनिट निशुल्क बिजली योजना के प्रति भारी उत्साह देखा जा रहा है। अक्टूबर से अब तक 2.69 लाख से अधिक उपभोक्ता इस योजना के तहत सौर संयंत्र लगाने की सहमति दे चुके हैं।
पीक ऑवर्स की चुनौती और बीकानेर में देश का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट
भविष्य की ऊर्जा मांगों को देखते हुए राजस्थान अब बिजली भंडारण (Energy Storage) तकनीक पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। वर्ष 2030 तक प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग 25,048 मेगावाट पहुँचने का अनुमान है।
- पूगल (बीकानेर): यहाँ 2,450 मेगावाट क्षमता का देश का सबसे बड़ा सोलर पार्क और 6,400 मेगावाट ऑवर की बैटरी ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित की जा रही है।
- महंगी बिजली से मुक्ति: नवंबर 2027 तक इन परियोजनाओं के पूरा होने से रात के ‘पीक ऑवर्स’ में भी सौर ऊर्जा उपलब्ध होगी, जिससे बाहरी राज्यों से महंगी बिजली खरीदने की मजबूरी खत्म हो जाएगी।
विजन 2030: 115 गीगावाट का लक्ष्य
राज्य की ‘स्वच्छ ऊर्जा नीति-2024’ के तहत सरकार ने वर्ष 2030 तक 115 गीगावाट अक्षय ऊर्जा और 10 गीगावाट ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। यह नीति राजस्थान को न केवल ऊर्जा में आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित होगी।