सायबर अपराध के बढ़ते मामलों पर प्रभावी नियंत्रण और पीड़ितों को त्वरित राहत देने के लिए प्रदेश के सायबर मुख्यालय में जल्द ही कॉल सेंटर शुरू किया जाएगा। इसके शुरू होने से राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दर्ज होने वाली सायबर अपराध की शिकायतें सीधे राज्य स्तर पर जुड़ जाएंगी, जिससेमामलों में तेजी से कार्रवाई संभव हो सकेगी। ठगी के मामले में शुरूआतीसमय को गोल्डन ऑवर माने जाते हैं। इस अवधि में ठगी की रकम को फ्रीज करवाना आसान होता है।
राज्य सायबर मुख्यालय द्वारा सायबर अपराध से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए 50 सीटर कॉल सेंटर स्थापित करने की योजना बनाई गई है। यह कॉलसेंटर 24 घंटे संचालित रहेगा। सायबर फ्रॉड के मामलों में शुरुआती दो घंटे कोगोल्डन ऑवर माना जाता है। यदि इस अवधि में पीड़ित द्वारा शिकायत दर्ज कराई जाती है, तो बैंकों में गई धोखाधड़ी की राशि को समय रहते फ्रीज किया जा सकता है। कॉल सेंटर शुरू हो से इस प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
सायबर पुलिस के अनुसार, कॉल सेंटर के माध्यम से शिकायत मिलते ही एक विशेष टीम सक्रिय होगी, जो बैंकों से समन्वय कर सायबर ठगी से जुड़ी रकम को फ्रीज कराने की कार्रवाई करेगी। इससे पीड़ितों को उनकी राशि वापस मिलने की संभावना बढ़ेगी। फिलहाल शिकायतें राष्ट्रीय स्तर पर दर्ज होने के बाद विभिन्न स्तरों से गुजरती हैं, जिससे कार्रवाई में समय लगता है। कॉल सेंटर बनने के बाद कोई मध्य प्रदेश का पीड़ित व्यक्ति 1930 पर शिकायत करता है तो उसका कॉल टॉवर लोकेशन को सर्च कर ऑटोमेटिक सभी शिकायतें सीधे भोपाल स्थित सायबर मुख्यालय के कॉल सेंटर पर ट्रांसफर हो जाएंगी। इससे न सिर्फ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित होगी, बल्कि शिकायतकर्ता को सही मार्गदर्शन और जरूरी जानकारी भी समय पर मिल सकेगी। कॉल सेंटर के माध्यम से पीड़ितों को आगे की कानूनी प्रक्रिया, बैंक समन्वय और राशि वापसी से जुड़ी जानकारी दी जाएगी। सायबर पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कॉल सेंटर की स्थापना का प्रस्ताव शासन को भेजा जा रहा है। स्वीकृति मिलते ही कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।