भारतीय पासपोर्ट की वैश्विक ताकत बढ़ी: हेनली इंडेक्स 2026 में 80वें स्थान पर पहुंचा भारत, 55 देशों में मिलेगी वीजा-फ्री एंट्री

दुनियाभर के पासपोर्टों की शक्ति का आकलन करने वाली संस्था ‘हेनली एंड पार्टनर्स’ ने साल 2026 की पहली तिमाही के लिए अपनी आधिकारिक रैंकिंग जारी कर दी है। इस नवीनतम ‘हेनली पासपोर्ट इंडेक्स’ (HPI) में भारतीय पासपोर्ट ने 5 पायदान की मजबूत छलांग लगाते हुए 80वां स्थान हासिल किया है। पिछले साल (2025) में भारत 85वें पायदान पर था।

55 देशों की यात्रा अब और आसान

नई रैंकिंग के अनुसार, भारतीय पासपोर्ट धारक अब दुनिया के 55 देशों में बिना किसी पूर्व वीजा या ‘वीजा-ऑन-अराइवल’ की सुविधा के साथ यात्रा कर सकते हैं। भारत ने यह रैंकिंग अल्जीरिया और नाइजर जैसे देशों के साथ साझा की है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की रैंकिंग में यह सुधार बेहतर कूटनीतिक संबंधों और विभिन्न देशों के साथ हुए हालिया द्विपक्षीय समझौतों का परिणाम है।

पड़ोसी देशों का हाल: पाकिस्तान और बांग्लादेश की स्थिति नाजुक

रैंकिंग में भारत अपने पड़ोसियों के मुकाबले काफी बेहतर स्थिति में है।

  • बांग्लादेश: 95वें स्थान पर है और दुनिया का 8वां सबसे कमजोर पासपोर्ट बना हुआ है।
  • पाकिस्तान: इस सूची में 98वें स्थान पर है, जिसे दुनिया का 5वां सबसे कमजोर पासपोर्ट बताया गया है। पाकिस्तानी नागरिक केवल 31 देशों में ही वीजा-फ्री प्रवेश पा सकते हैं।
  • अफगानिस्तान: 101वें स्थान के साथ दुनिया का सबसे कमजोर पासपोर्ट बना हुआ है, जिसे मात्र 24 देशों में एंट्री हासिल है।

दुनिया के सबसे ताकतवर पासपोर्ट: सिंगापुर फिर नंबर-1

वैश्विक स्तर पर एशियाई देशों का दबदबा बरकरार है:

  1. सिंगापुर: लगातार तीसरे साल दुनिया का सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट बना हुआ है। इसके नागरिक 192 देशों में वीजा-मुक्त प्रवेश कर सकते हैं।
  2. जापान और दक्षिण कोरिया: ये दोनों देश संयुक्त रूप से दूसरे स्थान (188 देश) पर हैं।
  3. यूरोपीय देश: डेनमार्क, स्विट्जरलैंड, स्वीडन और स्पेन जैसे देश संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर हैं।
  4. अमेरिका: अमेरिकी पासपोर्ट ने फिर से वापसी करते हुए टॉप-10 में जगह बनाई है और वह 10वें स्थान पर है।

UAE की ऐतिहासिक छलांग

इस रिपोर्ट में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) सबसे बड़े ‘चैलेंजर’ के रूप में उभरा है। पिछले दो दशकों में ऐतिहासिक प्रगति करते हुए UAE अब 5वें स्थान पर पहुंच गया है, जो कई विकसित देशों जैसे ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया से भी आगे है।