ईरान ने ट्रंप को दी खुली मौत की धमकी: ‘इस बार निशाना नहीं चूकेगा’

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब बेहद गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। ईरान में जारी बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनियों का कोई खास असर नहीं दिख रहा है। इसके उलट, तेहरान ने ट्रंप के खिलाफ खुली धमकी दी है।

हाल ही में ईरान के सरकारी टेलीविजन चैनल (IRINN) पर एक फुटेज प्रसारित किया गया, जिसमें 2024 में पेंसिल्वेनिया के बटलर शहर में ट्रंप पर हुए हत्या के प्रयास की तस्वीर दिखाई गई। उस घटना में एक बंदूकधारी ने ट्रंप पर गोली चलाई थी, लेकिन गोली उनके कान को छूकर निकल गई और वे बाल-बाल बच गए थे।

इस फुटेज में फारसी भाषा में एक चेतावनी भरा संदेश लिखा हुआ था: “इस बार निशाना नहीं चूकेगा” या “इस बार गोली नहीं चूकेगी”। यह संदेश स्पष्ट रूप से उस 2024 की घटना का जिक्र करते हुए दिया गया है, जिसे ईरान ने ट्रंप के लिए चेतावनी के तौर पर इस्तेमाल किया।

यह फुटेज तेहरान में उन प्रदर्शनों के दौरान मारे गए सुरक्षा कर्मियों और अन्य लोगों के अंतिम संस्कार समारोह के दौरान दिखाया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल थे, जिन्होंने “अमेरिका मुर्दाबाद” लिखे बैनर लहराए और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की तस्वीरें हाथों में थामी हुई थीं। अधिकारियों ने मारे गए लोगों को “शहीद” का दर्जा दिया है।

ट्रंप ने हाल के दिनों में ईरान में हो रहे प्रदर्शनों के दौरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर ईरान ऐसा करता रहा तो अमेरिका हस्तक्षेप करेगा और वह “पूरी तरह तैयार” है। इस पर ईरान ने जवाबी बयानबाजी तेज कर दी है।

गौरतलब है कि ईरान का नाम पहले भी अमेरिकी नेताओं के खिलाफ कथित हत्या की साजिशों से जुड़ा रहा है। जनवरी 2020 में जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद ईरान ने ट्रंप के खिलाफ बदले की कई बार कसमें ली थीं। इसके अलावा, अमेरिकी न्याय विभाग ने 2024 में एक ईरान-समर्थित साजिश को नाकाम करने की जानकारी दी थी, जिसमें ट्रंप को निशाना बनाने की योजना थी।

वर्तमान में ईरान में दिसंबर 2025 से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन आर्थिक संकट और राजनीतिक असंतोष के कारण तेज हो गए हैं। ईरानी सरकार ने इनका सख्ती से दमन किया है, जिसके चलते दोनों देशों के बीच जुबानी जंग अब सैन्य टकराव की आशंका पैदा कर रही है। स्थिति लगातार बदल रही है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसे बारीकी से देख रहा है।