मचाडो का ‘नोबेल डिप्लोमेसी’ कार्ड: ट्रम्प को सौंपा अपना शांति पदक; वेनेजुएला की सत्ता पर सस्पेंस बरकरार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो के बीच गुरुवार को व्हाइट हाउस में हुई एक नाटकीय मुलाकात ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। वेनेजुएला के पूर्व तानाशाह निकोलस मादुरो को अमेरिकी सेना द्वारा पकड़े जाने के बाद हुई इस पहली आमने-सामने की बैठक में मचाडो ने ट्रम्प को अपना असली ‘नोबेल शांति पुरस्कार’ मेडल भेंट कर सबको चौंका दिया।

इतिहास का हवाला और पदक का समर्पण

मुलाकात के बाद मचाडो ने इसे वेनेजुएलावासियों के लिए एक ऐतिहासिक पल बताया। उन्होंने 1825 के उस प्रसंग को दोहराया जब स्वतंत्रता सेनानी मार्क्विस डे लाफायेट ने जॉर्ज वॉशिंगटन का पदक साइमन बोलिवर को भाईचारे के प्रतीक के रूप में दिया था। मचाडो ने कहा कि आज बोलिवर के वंशज वह सम्मान ‘वॉशिंगटन के उत्तराधिकारी’ यानी डोनाल्ड ट्रम्प को लौटा रहे हैं। मचाडो को यह पुरस्कार अक्टूबर 2025 में वेनेजुएला में लोकतंत्र के लिए संघर्ष के लिए मिला था।

ट्रम्प की प्रतिक्रिया और पुराना विवाद

राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस भेंट पर खुशी जताते हुए ‘ट्रुथ सोशल’ पर मचाडो को एक “अद्भुत महिला” बताया और कहा कि मारिया ने उनके अच्छे कार्यों के लिए यह सम्मान प्रदान किया है, जो दोनों के बीच अद्भुत आपसी सम्मान को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ट्रम्प और मचाडो के बीच जारी पुराने विवाद को खत्म करने की एक कोशिश है। इससे पहले ट्रम्प ने मचाडो की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाए थे और उन्हें नोबेल मिलने पर भी नाराजगी जताई थी। अब मचाडो ने ट्रम्प की ‘शक्ति के माध्यम से शांति’ की नीति को अपना समर्थन देकर उन्हें खुश करने का प्रयास किया है।

राजनीतिक सस्पेंस और कार्यवाहक सरकार

इस भावुक भेंट के बावजूद ट्रम्प के राजनीतिक रुख में कोई स्पष्ट बदलाव नहीं दिखा है। वे अब भी वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और मचाडो को आधिकारिक समर्थन देने से कतरा रहे हैं। व्हाइट हाउस ने यह भी स्पष्ट नहीं किया है कि ट्रम्प ने इस पदक को आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है या यह केवल एक प्रतीकात्मक भेंट थी।

नोबेल संस्थान का स्पष्टीकरण

इस बीच, नॉर्वे के नोबेल संस्थान ने इस घटनाक्रम पर स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि यद्यपि पदक का भौतिक मालिकाना हक बदल सकता है, लेकिन ‘नोबेल शांति पुरस्कार विजेता’ की आधिकारिक उपाधि को कभी हस्तांतरित या साझा नहीं किया जा सकता। संस्थान ने साफ किया कि एक बार घोषित होने के बाद यह सम्मान और टाइटल हमेशा के लिए मूल विजेता के नाम ही रहता है।