MP में बिजली के दाम 10% बढ़ाने की तैयारी: घाटे के आंकड़ों को विशेषज्ञों ने बताया ‘फर्जी’, आयोग में आपत्ति दर्ज

मध्यप्रदेश की बिजली कंपनियों ने आम जनता पर महंगाई का एक और बोझ डालने की तैयारी कर ली है। बिजली कंपनियों ने प्रदेश में बिजली दरों में औसत 10.19 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग को भेजा है।

6,044 करोड़ का घाटा या आंकड़ों की बाजीगरी?

कंपनियों ने अपनी याचिका में 6,044 करोड़ रुपये का घाटा होने का दावा किया है, जिसे आधार बनाकर टैरिफ बढ़ाने की अनुमति मांगी गई है। हालांकि, बिजली कंपनियों के इस दावे पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। बिजली मामलों के विशेषज्ञ एडवोकेट राजेंद्र अग्रवाल ने नियामक आयोग के समक्ष इस प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने चौंकाने वाला दावा किया है कि बिजली कंपनियों ने 9,204 करोड़ रुपये के मनमाने और तथ्यहीन आंकड़े आयोग के सामने पेश किए हैं।

खारिज हो चुकी मांगों को फिर से जोड़ने का आरोप

विशेषज्ञों का आरोप है कि मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी ने उन खर्चों को भी घाटे में जोड़ दिया है जिन्हें आयोग पहले ही खारिज कर चुका था। इसमें साल 2014 से 2023 तक की असंवैधानिक मांगें और बिजली चोरी से हुआ 696 करोड़ का नुकसान शामिल है, जिसका बोझ अब ईमानदार उपभोक्ताओं पर डालने की तैयारी है। इसके अलावा, स्मार्ट मीटर के नाम पर 197 करोड़ रुपये मांगे गए हैं, जबकि विशेषज्ञों का दावा है कि कंपनियों ने अभी तक इसका भुगतान ही नहीं किया है।

जनता से 25 जनवरी तक मांगे गए सुझाव

विद्युत नियामक आयोग ने इस टैरिफ याचिका पर 25 जनवरी तक आम जनता से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। इसके बाद भोपाल, इंदौर और जबलपुर में जनसुनवाई आयोजित की जाएगी। विशेषज्ञों ने मांग की है कि यह सुनवाई ऑनलाइन के बजाय फिजिकल मोड में हो, ताकि कंपनियों के दावों की सच्चाई और पारदर्शिता की जांच की जा सके।