जैश-ए-मोहम्मद लाल किला हमले में शामिल, पाकिस्तान का दावा फेल

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की 1267 प्रतिबंध समिति की नवीनतम रिपोर्ट ने पाकिस्तान को बड़ा झटका दिया है। रिपोर्ट में पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद को दिल्ली के लाल किले के पास नवंबर 2025 में हुए घातक विस्फोट से जोड़ा गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, एक सदस्य देश ने जानकारी दी कि जैश-ए-मोहम्मद ने कई आतंकी हमलों की जिम्मेदारी ली है। इसमें 9 नवंबर 2025 को लाल किले पर हुए हमले का भी जिक्र है, जिसमें 15 निर्दोष लोगों की मौत हो गई थी। यह घटना एक कार बम विस्फोट के रूप में हुई थी, जिसे आत्मघाती हमले के तौर पर देखा जा रहा है।

रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण खुलासा किया गया है कि जैश-ए-मोहम्मद अपनी गतिविधियों का विस्तार कर रहा है। संगठन के प्रमुख मौलाना मसूद अजहर अल्वी ने 8 अक्टूबर 2025 को जमात-उल-मुमिनात नाम से एक विशेष महिला विंग की स्थापना की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य आतंकी हमलों के लिए रसद, समर्थन और अन्य सहायता जुटाना बताया गया है।

पाकिस्तान ने रिपोर्ट पर कड़ा विरोध जताया और दावा किया कि जैश-ए-मोहम्मद अब निष्क्रिय हो चुका है। हालांकि, अन्य सदस्य देशों ने भारत द्वारा पेश किए गए सबूतों का समर्थन किया, जिससे रिपोर्ट में जैश का उल्लेख बरकरार रहा। इसे भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है, क्योंकि पाकिस्तान लंबे समय से दावा करता रहा है कि उसकी जमीन पर ऐसे आतंकी संगठन सक्रिय नहीं हैं।

इसके अलावा, रिपोर्ट ने पाकिस्तान और चीन को बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) के मुद्दे पर भी करारा झटका दिया। दोनों देश BLA और उसके सहयोगी मजीद ब्रिगेड को अल-कायदा या आईएसआईएल से जुड़ा बताकर 1267 सूची में शामिल कराने की कोशिश कर रहे थे। इसका मकसद CPEC पर हो रहे हमलों को वैश्विक आतंकवाद से जोड़ना था। लेकिन रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया कि सदस्य देशों के आकलन के अनुसार BLA का अल-कायदा या अन्य वैश्विक आतंकी समूहों से कोई संबंध नहीं है।

अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने इस प्रस्ताव पर तकनीकी होल्ड लगा दिया है, जिससे यह कम से कम छह महीने के लिए रुका हुआ है। यह वही रणनीति है, जिसे चीन अतीत में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के खिलाफ भारत के प्रस्तावों पर इस्तेमाल करता रहा है।