मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) की प्रथम वर्ष एमबीबीएस छात्रा रोशनी कलेश (19) की संदिग्ध मौत के मामले में नया मोड़ आया है। पुलिस जांच में छात्रा के मोबाइल से डिलीट किया गया सुसाइड नोट रिकवर हुआ है, जिसमें उसने पढ़ाई के बढ़ते दबाव का जिक्र करते हुए माता-पिता से माफी मांगी है।
नोट में रोशनी ने लिखा है, “सॉरी मम्मी-पापा, नीट निकालना आसान है, लेकिन एमबीबीएस की पढ़ाई करना उससे भी कठिन है।” पुलिस के अनुसार, यह नोट मौत से कुछ घंटे पहले (रात करीब 1 से 1:30 बजे के बीच) लिखा गया था और खुद को व्हाट्सएप किया गया था। मोबाइल को फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) भेजकर नोट की टाइमिंग और सत्यता की जांच की जा रही है।
घटना 10 फरवरी की सुबह की है, जब रोशनी का शव कोहेफिजा क्षेत्र के एक निजी हॉस्टल (पीजी) के बाथरूम में बेसुध अवस्था में मिला था। पास में एसिड की खाली बोतल पड़ी थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से मौत का कारण एसिड पीने से आंतरिक जलन और ब्लीडिंग पुष्टि हुई है। रोशनी मूल रूप से अलीराजपुर जिले की रहने वाली थीं और हाल ही में घर से लौटी थीं।
परिजनों ने हत्या की आशंका जताई है और निष्पक्ष जांच की मांग की। रोशनी के पिता वंतर सिंह ने कहा कि बेटी ऐसा कदम नहीं उठा सकती, कपड़े खराब नहीं थे और कोई अन्य संकेत नहीं मिले। उन्होंने हॉस्टल प्रबंधन और जांच पर सवाल उठाए हैं। वहीं, छात्रों और परिजनों ने कोहेफिजा थाने का घेराव किया और जांच में देरी का आरोप लगाया। मामले में छात्रों के विरोध के बाद पुलिस ने हॉस्टल में देर रात पूछताछ की, जिससे कैंपस में तनाव बढ़ा।
पुलिस आत्महत्या के एंगल से जांच कर रही है, लेकिन सभी पहलुओं की पड़ताल जारी है। जीएमसी प्रशासन ने छात्राओं के मानसिक स्वास्थ्य के लिए हर महीने 10 तारीख को ‘मेंटल अवेयरनेस डे’ मनाने की घोषणा की है।