मेरठ, उत्तर प्रदेश। मेरठ के गौरव, विश्वप्रसिद्ध वाद्य यंत्र बिगुल (Bugle) को अब आधिकारिक रूप से भौगोलिक संकेत (Geographical Indication – GI) टैग प्रदान कर दिया गया है। यह उपलब्धि मेरठ के हस्तशिल्प और संगीत वाद्य यंत्र उद्योग के लिए एक बड़ी पहचान है, जिससे अब यह बिगुल दुनिया भर में अपनी एक विशिष्ट और आधिकारिक पहचान के साथ जाना जाएगा।
जीआई टैग मिलने से इस उत्पाद की गुणवत्ता और उत्पत्ति की विशिष्टता प्रमाणित हो गई है। यह टैग उन भौगोलिक क्षेत्रों को दिया जाता है जहाँ की विशेषताएँ उस उत्पाद में समाहित होती हैं।
मेरठ का बिगुल निर्माण का इतिहास काफी पुराना है। इस वाद्य यंत्र का निर्माण मेरठ शहर में पहली बार 1885 में जली कोठी नामक स्थान पर शुरू हुआ था। इस कारोबार को वाणिज्यिक स्तर पर पहचान दिलाने का श्रेय शहर की मशहूर नादर अली एंड कंपनी को जाता है, जिसने सबसे पहले इसके व्यवसाय की शुरुआत की थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस जीआई टैग से मेरठ के स्थानीय कारीगरों को आर्थिक बल मिलेगा और इस पारंपरिक वाद्य यंत्र के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, जिससे इसकी वैश्विक मांग में वृद्धि होगी।