सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: सीनियर वकीलों पर मौखिक उल्लेख करने की रोक

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा बदलाव किया है। कोर्ट ने सीनियर अधिवक्ताओं द्वारा किसी भी बेंच के सामने मौखिक उल्लेख करने पर पूरी तरह रोक लगा दी है और इसके लिए जारी नए सर्कुलर में साफ कहा गया है कि अब मौखिक उल्लेख सिर्फ जूनियर तथा युवा वकीलों को ही करने की अनुमति होगी तथा उन्हें इसके लिए प्रोत्साहित भी किया जाएगा। जमानत, जमानत रद्द करना, मृत्युदंड, हेबियस कॉर्पस, बेदखली या विध्वंस तथा अंतरिम राहत जैसे सभी नए मामले अब दाखिल होने के अगले दो कार्य दिवसों के अंदर अनिवार्य रूप से लिस्ट कर दिए जाएंगे। यदि कोई मामला इतना अत्यावश्यक हो कि दो दिन का इंतजार भी संभव न हो, तो निर्धारित प्रोफॉर्मा के साथ सुबह 10:30 बजे से पहले लिस्टिंग अधिकारी को आवेदन देना होगा। कोर्ट ने अनावश्यक स्थगन पर भी सख्ती दिखाई है और स्पष्ट किया है कि अब स्थगन केवल परिवार में मृत्यु, वकील या पक्षकार की गंभीर बीमारी या अन्य वास्तविक एवं कोर्ट को संतुष्ट करने वाले कारणों से ही मंजूर किया जाएगा। इन नए नियमों का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी को खत्म करना और वास्तव में जरूरी मामलों का तेजी से निपटारा सुनिश्चित करना है।