अडाणी समूह में एलआईसी के भारी-भरकम निवेश और वॉशिंगटन पोस्ट की नई रिपोर्ट के बाद एक बार फिर संसद में हंगामा मच गया। सोमवार को लोकसभा में विपक्ष ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया और वित्त मंत्रालय से सवाल किया कि क्या एलआईसी को अडाणी ग्रुप की कंपनियों में पैसा लगाने के लिए सरकार की तरफ से कोई दबाव बनाया गया था।
जवाब में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सदन को विस्तृत जानकारी दी और साफ कहा कि एलआईसी के निवेश के फैसले पूरी तरह से स्वतंत्र होते हैं। वित्त मंत्रालय न तो कोई निर्देश देता है और न ही किसी खास कंपनी में निवेश की सलाह देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एलआईसी एक स्वायत्त संस्था है, जिसकी अपनी विशेषज्ञ टीम बाजार की स्थिति, जोखिम मूल्यांकन और कंपनी के वित्तीय स्वास्थ्य का गहन विश्लेषण करके ही निवेश करती है।
वित्त मंत्री ने पहली बार सदन में आंकड़े पेश करते हुए बताया कि एलआईसी ने अडाणी समूह की छह सूचीबद्ध कंपनियों में कुल 38,658.85 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं, जबकि बॉन्ड और डिबेंचर में 9,625.77 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये निवेश एकाएक नहीं हुए, बल्कि कई वर्षों से चल रही रणनीतिक निवेश प्रक्रिया का हिस्सा हैं।