महावीर जयंती 2026: करुणा और शांति का पर्व

महावीर जयंती जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाने वाला एक प्रमुख पर्व है। यह पर्व चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को आता है, जो आमतौर पर मार्च या अप्रैल माह में पड़ता है। वर्ष 2026 में महावीर जयंती 31 मार्च को मनाई जाएगी। इस दिन जैन अनुयायी भगवान महावीर की शिक्षाओं को याद करते हैं और अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य तथा अपरिग्रह जैसे पंच महाव्रतों का पालन करने का संकल्प लेते हैं।

भगवान महावीर का जन्म लगभग 599 ईसा पूर्व बिहार के कुंडलपुर (वैशाली) में राजा सिद्धार्थ और रानी त्रिशला के घर हुआ था। उनका बचपन का नाम वर्धमान था। उन्होंने 30 वर्ष की आयु में गृहस्थ जीवन त्यागकर साधना की राह चुन ली। 12 वर्षों की कठोर तपस्या के बाद उन्हें केवल ज्ञान प्राप्त हुआ। वे 72 वर्ष की आयु तक भारत के विभिन्न भागों में घूमकर लोगों को अहिंसा और करुणा का संदेश देते रहे। उनका निर्वाण 527 ईसा पूर्व पावापुरी में हुआ।

महावीर जयंती का महत्व जैन धर्म में अत्यंत गहरा है। इस दिन जैन मंदिरों को फूलों और दीपों से सजाया जाता है। भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं, सफेद वस्त्र धारण करते हैं और मंदिर में जाकर भगवान महावीर की पूजा-अर्चना करते हैं। रथ यात्रा निकाली जाती है जिसमें भगवान की मूर्ति को शोभायात्रा में ले जाया जाता है। लोग अहिंसा का प्रतीक श्वेत वस्त्र पहनकर जुलूस में शामिल होते हैं।

इस पर्व पर जैन समुदाय विशेष रूप से अहिंसा पर बल देता है। मंदिरों में प्रवचन होते हैं, जहां भगवान की शिक्षाएं सुनाई जाती हैं। लोग जीव-जंतुओं को बचाने, शाकाहारी भोजन अपनाने और दान-पुण्य करने का संकल्प लेते हैं। महावीर स्वामी ने कहा था – “अहिंसा परमो धर्मः” अर्थात अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है। उनकी शिक्षाएं आज भी पर्यावरण संरक्षण, पशु अधिकार और शांति के संदेश देती हैं।

महावीर जयंती केवल जैनों का नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता का त्योहार है। इस अवसर पर विभिन्न धर्मों के लोग भी एक-दूसरे के साथ सद्भावना रखते हैं। स्कूलों और कॉलेजों में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यह दिन हमें सिखाता है कि सच्ची खुशी भौतिक सुखों में नहीं, बल्कि आत्म-संयम और करुणा में छिपी है।