MP में घर-जमीन महंगी! 1 अप्रैल से 16% बढ़ी गाइडलाइन दरें

मध्य प्रदेश में आज से घर-जमीन की खरीद महंगी हो गई है। केंद्रीय मूल्यांकन समिति ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई कलेक्टर गाइडलाइन को मंजूरी दे दी, जिसमें प्रदेश की कुल लगभग 1.05 लाख लोकेशन्स में से 65,300 पर औसतन 16 प्रतिशत बढ़ोतरी की गई है। बाकी जगहों पर दरें पहले जैसी बनी रहेंगी। इस बदलाव से स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्री शुल्क बढ़ जाएगा, जिसका सीधा असर आम खरीदारों पर पड़ेगा।

राजधानी भोपाल में कुल 2177 लोकेशन्स में से 740 पर गाइडलाइन दरें संशोधित हुई हैं। इनमें एयरपोर्ट रोड, अयोध्या बायपास, कोलार रोड, निशातपुरा रोड, भानपुर और आसपास के विकासशील इलाके शामिल हैं। यहां बढ़ोतरी 10-11 प्रतिशत से लेकर कुछ जगहों पर 180 प्रतिशत तक पहुंच गई है। उदाहरण के तौर पर, भानपुर के नर्मल सिटी क्षेत्र में आवासीय दरें पहले से काफी ऊंची हो गई हैं।

इंदौर में सबसे व्यापक प्रभाव देखने को मिला है। जिले की 4840 लोकेशन्स में से 2625 पर नई दरें लागू हुई हैं। न्यूनतम 10 प्रतिशत से लेकर अधिग्रहीत गांवों और बाहरी इलाकों में 200-300 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। नई विकसित कॉलोनियों को भी गाइडलाइन में शामिल किया गया है, ताकि रजिस्ट्री प्रक्रिया सुव्यवस्थित हो सके।

अन्य प्रमुख जिलों में स्थिति

  • उज्जैन: शहर और ग्रामीण क्षेत्रों की 25 से अधिक लोकेशन्स पर 100 से 150 प्रतिशत तक बढ़ोतरी। महाकाल क्षेत्र, तिरूपति ग्राण्ड और प्रमुख मार्गों पर असर ज्यादा।
  • ग्वालियर और जबलपुर: इन जिलों में भी कई इलाकों में 15 से 99 प्रतिशत तक दरें ऊंची की गई हैं, खासकर नए विकास क्षेत्रों और हाईवे किनारे की प्रॉपर्टी में।

अन्य महत्वपूर्ण बदलाव

पांच साल बाद पहली बार पक्के (RCC) मकानों की निर्माण लागत में 1000 रुपये प्रति वर्ग मीटर की बढ़ोतरी की गई है। इससे नए घर बनाने वालों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। प्रीमियम अपार्टमेंट्स (स्विमिंग पूल, जिम, क्लब हाउस वाली सुविधाओं वाले) को अलग श्रेणी में रखा गया है, जिनकी वैल्यूएशन सामान्य फ्लैटों से 10 प्रतिशत ज्यादा होगी।

31 मार्च को अंतिम दिन पुरानी दरों पर रजिस्ट्री कराने के लिए भोपाल सहित कई शहरों में रजिस्ट्री ऑफिसों में भारी भीड़ रही। भोपाल में उस दिन 1296 रजिस्ट्री हुईं, जिनसे 32.35 करोड़ रुपये का राजस्व जमा हुआ।

बढ़ोतरी के पीछे के कारण

जिला स्तर की मूल्यांकन समितियों ने पिछले पांच वर्षों के रजिस्ट्री ट्रेंड, बाजार दरों, नए हाईवे-बायपास, औद्योगिक विकास और टीएंडसीपी से मंजूर कॉलोनियों को आधार बनाया। उद्देश्य बाजार मूल्य और सरकारी दरों के बीच के अंतर को कम करना है। रियल एस्टेट संगठनों ने कुछ सुझाव दिए, लेकिन ज्यादातर प्रस्तावों को मंजूरी मिल गई।