इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान बातचीत फेल: 21 घंटे की मैराथन वार्ता के बाद भी कोई डील नहीं

अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित महत्वपूर्ण शांति वार्ता बिना किसी ठोस निष्कर्ष के समाप्त हो गई है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने के उद्देश्य से बुलाई गई इस द्विपक्षीय बैठक में किसी भी प्रमुख मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी।

वार्ता का मुख्य फोकस सामरिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज रहा, जो युद्ध समाप्ति के बाद से अत्यधिक तनावपूर्ण रहा है। हालांकि वार्ता बेनतीजा रही, लेकिन राहत की बात यह रही कि शनिवार को इस जलडमरूमध्य से कम से कम 16 जहाज गुजरने में सफल रहे, जो युद्धविराम के बाद अब तक का सबसे व्यस्त दिन साबित हुआ।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, अमेरिकी नौसेना के दो गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर यूएसएस फ्रैंक ई. पीटरसन और यूएसएस माइकल मर्फी इस क्षेत्र में सक्रिय रूप से तैनात हैं। इन जहाजों को ईरानी समुद्री क्षेत्र में संभावित बारूदी सुरंगों को साफ करने और जलमार्ग को सुरक्षित बनाने के अभियान में लगाया गया है।

निगरानी एजेंसी मैरीन ट्रैफिक ने पुष्टि की है कि अमेरिकी सुरक्षा घेरे के तहत चीन, हांगकांग और लाइबेरिया के झंडे वाले तीन बड़े तेल टैंकरों को सफलतापूर्वक निकाला गया है।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अपने बयान में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह खोलने जैसे संवेदनशील मुद्दों पर किसी गहरे मतभेद का जिक्र नहीं किया। गौरतलब है कि विश्व का यह सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा संभालता है। इसके बंद रहने से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।

वार्ता के दौरान पाकिस्तान ने तनाव कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया। पाकिस्तान ने प्रस्ताव रखा कि विवादित जलमार्ग में अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुचारू रूप से चलाने के लिए दोनों देशों की संयुक्त गश्त और निगरानी तंत्र स्थापित किया जाए। इस्लामाबाद का यह सुझाव क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।