उत्तराखंड में चारधाम यात्रा की शुरुआत और केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने अपने संदेश में इस यात्रा को भारत की सनातन सांस्कृतिक चेतना का भव्य उत्सव बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा भारत की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने उल्लेख किया कि आदि शंकराचार्य, रामानुजाचार्य और माधवाचार्य जैसे महान संतों ने इन धामों की यात्राओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति को समृद्ध किया।
उन्होंने कहा कि हर वर्ष देशभर से विभिन्न भाषाओं, परंपराओं और संस्कृतियों के लोग इन धामों में पहुंचते हैं, जिससे ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को बल मिलता है। इस वर्ष की यात्रा भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाएगी।
प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के विकास का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य पर्यटन, आध्यात्मिकता और आर्थिक प्रगति के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि “यह दशक उत्तराखंड का दशक” साबित हो रहा है और यहां का विकास चारधाम यात्रा को पहले से अधिक सुगम और सुरक्षित बना रहा है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे यात्रा के दौरान “डिजिटल उपवास” अपनाकर प्रकृति के करीब रहने का प्रयास करें। साथ ही स्वच्छता बनाए रखने, नदियों को प्रदूषण से बचाने, सिंगल यूज प्लास्टिक से परहेज करने और पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने का आग्रह किया।
प्रधानमंत्री ने यात्रियों से स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की भी अपील की। उन्होंने सुझाव दिया कि कुल खर्च का कम से कम पांच प्रतिशत स्थानीय वस्तुओं की खरीद पर खर्च करें, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।
इसके अलावा उन्होंने यात्रा के नियमों और यातायात निर्देशों का पालन करने, सहयात्रियों की सहायता करने और सेवा भाव के साथ यात्रा को सफल बनाने की बात कही। प्रधानमंत्री ने कंटेंट क्रिएटर्स और इंफ्लूएंसर्स से भी उत्तराखंड की स्थानीय परंपराओं और कहानियों को व्यापक स्तर पर साझा करने का आग्रह किया।