प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की यूएई यात्रा के दौरान भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की आपूर्ति को लेकर महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ हुई बैठक में दोनों देशों ने ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के कई फैसले लिए।
प्रधानमंत्री मोदी पांच देशों के दौरे पर निकले हैं, जिसकी शुरुआत यूएई से हुई। अबू धाबी पहुंचते ही उनके विमान को यूएई वायुसेना के F-16 फाइटर जेट्स ने एस्कॉर्ट किया। यह राजकीय सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है, जो दोनों देशों के गहरे सामरिक संबंधों को दिखाता है। लैंडिंग के बाद राष्ट्रपति अल नाहयान ने व्यक्तिगत रूप से स्वागत किया और गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया।
मुख्य समझौते
- एलपीजी सप्लाई एग्रीमेंट: भारत की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लंबी अवधि की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने वाला समझौता किया गया। यूएई भारत की एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा पहले से पूरा करता है।
- रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) पर MoU: दोनों देशों ने सामरिक तेल भंडारण पर सहयोग बढ़ाने का फैसला लिया, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और मजबूत होगी।
- रक्षा सहयोग: सामरिक रक्षा साझेदारी का फ्रेमवर्क तैयार करने पर सहमति बनी।
यूएई ने भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और वित्तीय क्षेत्र में 5 अरब डॉलर (करीब 42,000 करोड़ रुपये) के निवेश की घोषणा की है। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति अल नाहयान को यूएई को अपनी ‘दूसरी मातृभूमि’ बताते हुए दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास का जिक्र किया। बैठक में पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी चर्चा हुई।