ऑनलाइन रियल मनी गेम्स पर प्रतिबंध लगाने वाले एक विधेयक के संसद में पारित होने से देश की ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री को बड़ा झटका लगा है. इस विधेयक के कानून बनने से ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को अपना बिजनेस मॉडल बदलने या पूरी तरह से बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
कानूनी लड़ाई की तैयारी में गेमिंग कंपनियां
रिपोर्ट के अनुसार, Dream11 और Gameskraft जैसी प्रमुख ऑनलाइन गेमिंग कंपनियां इस प्रतिबंध के खिलाफ केंद्र सरकार को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रही हैं। सूत्रों ने बताया कि ये कंपनियां अपने वकीलों से सलाह ले रही हैं और व्यक्तिगत रूप से या एक समूह के रूप में याचिकाएं दायर करने पर विचार कर रही हैं। इन कंपनियों का कहना है कि यह प्रतिबंध उनके व्यापारिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।
कानून का उद्देश्य और प्रभाव
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में ‘प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल’ पेश करते हुए कहा था कि ऑनलाइन मनी गेमिंग की लत ड्रग्स की लत की तरह है. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस तरह के गेम्स से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल आतंकवाद के लिए भी किया जा रहा है.
इस बिल में ऑनलाइन सट्टेबाजी, लॉटरी और फैंटेसी स्पोर्ट्स जैसी सभी गतिविधियों को प्रतिबंधित करने का प्रावधान है। इस कानून के लागू होने के बाद इन गेम्स से जुड़े सभी विज्ञापनों पर भी रोक लग जाएगी। ऑनलाइन मनी गेमिंग उद्योग का वार्षिक राजस्व 31,000 करोड़ रुपये से अधिक है, जिससे सरकार को लगभग 20,000 करोड़ रुपये का टैक्स मिलता है. इस कानून से ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों के राजस्व पर सीधा और गंभीर प्रभाव पड़ेगा। अब इस बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार है जिसके बाद यह कानून बन जाएगा।