मोहन सरकार फिर लेगी 4,000 करोड़ का कर्ज

कर्ज के बोझ तले दबी मोहन सरकार एक बार फिर बाजार से बड़ा कर्ज लेने जा रही है। सरकार आज रिजर्व बैंक के जरिए कुल 4,000 करोड़ रुपए का ऋण उठाएगी। यह कर्ज तीन हिस्सों में लिया जाएगा, जिसमें 1,500-1,500 करोड़ रुपए के दो और 1,000 करोड़ रुपए का एक ऋण शामिल है। जानकारी के मुताबिक, यह रकम 10 सितंबर को सरकार के खाते में पहुंच जाएगी।

कुल बकाया कर्ज पहुंचा ₹4.53 लाख करोड़ के पार

बताया जा रहा है कि इस धनराशि का उपयोग सरकार लाड़ली बहना योजना की अगली किस्त, सितंबर में आयोजित होने वाले सेवा पर्व और अन्य बड़ी परियोजनाओं के भुगतान में करेगी। इससे पहले भी 26 अगस्त को सरकार ने बाजार से 4,800 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था।

राज्य की वित्तीय स्थिति पर नज़र डालें तो चालू वित्त वर्ष में सरकार अब तक कई बार बाजार से कर्ज ले चुकी है। आज का कर्ज मिलाकर मौजूदा वित्त वर्ष में कुल उधारी का आंकड़ा 31,900 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा। वहीं, राज्य पर कुल बकाया कर्ज 4,53,640.27 करोड़ रुपए के पार निकल जाएगा। जबकि 31 मार्च 2025 तक यह कर्ज 4,21,740.27 करोड़ रुपए था।

राजस्व अधिशेष का हवाला दे रही सरकार, लेकिन विशेषज्ञों ने बढ़ते कर्ज पर जताई चिंता

सरकार का कहना है कि वह यह कर्ज अपनी तय सीमा के भीतर ही ले रही है। वित्त वर्ष 2023-24 में सरकार 12,487.78 करोड़ रुपए के राजस्व अधिशेष में थी। उस साल प्रदेश की कुल आमदनी 2,34,026.05 करोड़ रुपए और खर्च 2,21,538.27 करोड़ रुपए रहा था। मौजूदा वित्त वर्ष 2024-25 के संशोधित अनुमान के अनुसार, प्रदेश की आमदनी 2,62,009.01 करोड़ और खर्च 2,60,983.10 करोड़ रहने की उम्मीद है। यानी इस साल भी लगभग 1,025.91 करोड़ रुपए का राजस्व अधिशेष संभावित है।

हालांकि, लगातार बढ़ते कर्ज के बीच विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकार को दीर्घकालिक वित्तीय संतुलन पर ध्यान देने की ज़रूरत है, वरना आने वाले वर्षों में ऋण का बोझ और भारी हो सकता है।