मध्य प्रदेश में मेट्रो रेल नेटवर्क का विस्तार जल्द ही देखने को मिलेगा. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में उज्जैन-इंदौर-पीथमपुर मेट्रो रेल परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के लिए परामर्श शुल्क को मंजूरी दे दी गई है. यह निर्णय राज्य के शहरी परिवहन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
परियोजना का चरणबद्ध विस्तार
यह पूरी परियोजना दो चरणों में पूरी होगी. पहले चरण में मेट्रो लाइन श्री महाकालेश्वर, उज्जैन से लवकुश चौराहा, इंदौर तक जाएगी. इसके बाद, दूसरे चरण में इसे लवकुश चौराहा से पीथमपुर तक बढ़ाया जाएगा, जिससे औद्योगिक क्षेत्र को भी शहर से जोड़ा जा सकेगा.
इस परियोजना की DPR तैयार करने का काम दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (DMRC) को सौंपा गया है. इसके लिए DMRC को 9 लाख रुपये प्रति किलोमीटर (GST सहित) का परामर्श शुल्क दिया जाएगा.
मेट्रो का नेटवर्क शहरों के उपनगरों तक फैलेगा
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि राज्य की मेट्रो परियोजना सिर्फ इंदौर और भोपाल के लिए नहीं है, बल्कि इसका लक्ष्य आस-पास के उपनगरों को भी मुख्य शहरों से जोड़ना है. उन्होंने कहा कि यह एक बड़ी परियोजना है, जिसे पूरा होने में 20 से 25 साल का समय लग सकता है, लेकिन इस पर काम शुरू हो चुका है.
मंत्री के अनुसार, इंदौर से उज्जैन और इंदौर से पीथमपुर रूट पर सर्वेक्षण का काम चल रहा है. उम्मीद है कि अगले चार से पांच वर्षों में पीथमपुर से उज्जैन तक मेट्रो सेवा इंदौर से होते हुए शुरू हो सकती है. इसके अलावा, इंदौर से देवास और इंदौर से धार तक भी मेट्रो सेवा शुरू करने की योजना है. इन मार्गों पर यातायात सर्वेक्षण किया जाएगा और संभावनाओं के आधार पर आगे का काम किया जाएगा.