प्रदेश के चार बड़े शहरों की 3804 शिकायतों पर केवल 25 गिरफ्तार

पुलिस के खिलाफ शिकायतों पर एमपी में कार्रवाई का यह स्तर…

मध्य प्रदेश में बेलगाम होती पुलिस को उनके ही अफसर संरक्षण देते हैं। हाल ही में सिवनी और भोपाल में सामने आई पुलिस की करतूत ऐसे ही संरक्षण का नतीजा माना जा रहा है। मध्य प्रदेश में पुलिस के खिलाफ हजारों की संख्या में शिकायतें होती है, लेकिन पुलिस अफसर अपनों पर कार्रवाई करने में कमजोर साबित हो रहे हैं। इन शिकायतों पर कार्रवाई नाम मात्र के पुलिसकर्मियों और अफसरों पर होती है। अपनों को बचाने का चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है, नेशनल क्राइम रिपोर्ट ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट में।

चार शहरों में पौने चार हजार आई शिकायतें

हाल ही में एनसीआरबी की जो रिपोर्ट सामने आई है, उसमें मध्य प्रदेश के चार शहरों का जिक्र किया गया है। इसमें भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में पुलिस के खिलाफ आई शिकायतों की विस्तार से जानकारी दी गई है। इसमें बताया गया है कि वर्ष 2023 में इन चारों शहरों में मिलाकर 3804 शिकायतें पुलिस के खिलाफ आई। इनमें से सबसे ज्यादा शिकायतें ग्वालियर में आई। यहां पर 1603 शिकायते सामने आई, जबकि इंदौर में 1103, भोपाल में 744 और जबलपुर में 277 शिकायतें पुलिस के खिलाफ पहुंची। पुलिस के खिलाफ शिकायतों का आंकड़ा महज चार शहरों का है। पौने चार हजार शिकायतों में से महज 25 पुलिसकर्मी या अफसरों की गिरμतारी हो सकी है। जबकि इनमें से सिर्फ 38 मामलों में चार्जशीट पेश की गई। यानि इन चार शहरों में अपनों को बचाने का खेल जिस तेजी से चल रहा है, वह पुलिस की साख पर भी सवाल खडेÞ कर रहा है।

जिनमें जांच के आदेश वे अधिकांश सही पाई गई

भोपाल में 50, ग्वालियर में 23, इंदौर में इंदौर में 43 और जबलपुर में एक के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए। इसमें से भोपाल में 50 में से 42 की जांच पूरी हुई और 41 के खिलाफ शिकायत सही पाई गई। जबकि ग्वलियर में 23 की ही जांच पूरी हुई इसमें से 22 के खिलाफ शिकायत सही पाई गई। इंदौर में 34 की जांच पूरी हुई, जिसमें से 32 शिकायतें सही पाई गई। जबलपुर में एक की जांच की गई और वह सही पाई गई। यानि जिनकी जांच की जा रही है, वे अधिकांश सही पाई जा रही है।

जन सुनवाई में आती है सबसे ज्यादा ऐसी शिकायतें

पुलिस मुख्यालय की जनसुनवाई में सबसे ज्यादा शिकायतें पुलिस की ही आती है। जिसमें पुलिस द्वारा शिकायत पर एफआईआर दर्ज नहीं करने की बात सबसे ज्यादा सामने आती है। इन शिकायतों के चलते ही पूर्व में पुलिस मुख्यालय की जनसुनवाई लगभग बंद सी कर दी गई थी, लेकिन कैलाश मकवाना के डीजीपी बनते ही जनवरी से जनसुनवाई फिर से शुरू कर दी गई। इसमें पुलिस के खिलाफ सबसे ज्यादा शिकायतें आ रही है। इसी तरह सीएम हेल्पलाइन में भी पुलिस से संबंधित इस तरह की लगातार शिकायतें सामने आती है। ऐसा माना ही जाता है कि जब जिले की पुलिस नहीं सुनती है तब ही पीड़ित भोपाल तक आकर शिकायत करते हैं। हालांकि इसी तरह के एक मामले में बैतूल जिले के गंज में थाना प्रभारी रहे अरविंद कुमरे को डीजीपी ने सस्पेंड कर दिया था। अब उनकी जांच भी चल रही है।