हरीश राणा को मिली इच्छामृत्यु, अंतिम संस्कार में पिता की भावुक अपील: कोई मत रोना

देश में पैसिव इच्छामृत्यु की कानूनी अनुमति पाने वाले पहले व्यक्ति गाजियाबाद निवासी 31 वर्षीय हरीश राणा का मंगलवार शाम दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में निधन हो गया। बुधवार सुबह दक्षिण दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।

भावुक पिता अशोक राणा (62 वर्ष) ने हाथ जोड़कर सभी से अपील की, “कोई रोना मत… बेटा शांति से चला जाए।” परिवार ने दुख की इस घड़ी में भी मानवता का उदाहरण पेश करते हुए हरीश के अंगदान का फैसला लिया। AIIMS के डॉक्टरों ने उनकी दोनों आंखों के कॉर्निया और हृदय के वाल्व सफलतापूर्वक दान कर दिए, जिससे दो लोगों को नई रोशनी और चार अन्य को हार्ट वाल्व से नई जिंदगी मिलने की उम्मीद है। कुल छह लोगों को लाभ पहुंचने की संभावना है।

हरीश राणा वर्ष 2013 में पंजाब के खरार में बीटेक की पढ़ाई के दौरान पेइंग गेस्ट हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए थे। इस हादसे में उन्हें गंभीर ब्रेन इंजरी आई और वे स्थायी वेजिटेटिव स्टेट (कोमा जैसी अवस्था) में चले गए। पिछले 13 वर्षों से वे बिस्तर पर ही थे। परिवार ने लंबे संघर्ष के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया और क्लिनिकली असिस्टेड न्यूट्रिशन एंड हाइड्रेशन हटाने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि प्रक्रिया गरिमापूर्ण तरीके से और पैलिएटिव केयर के तहत हो।

14 मार्च को हरीश को गाजियाबाद से AIIMS के पैलिएटिव केयर यूनिट में शिफ्ट किया गया। वहां लाइफ सपोर्ट धीरे-धीरे हटाया गया। मंगलवार को शाम 4:10 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।

अंतिम यात्रा और अंगदान

अंतिम संस्कार के समय ग्रीन पार्क श्मशान घाट पर सैकड़ों लोग मौजूद थे। हरीश का पार्थिव शरीर फूलों से सजाया गया था। छोटे भाई आशीष राणा ने मुखाग्नि दी। पिता अशोक राणा ने रोते हुए कहा, “बेटा अब जहां भी जन्म ले, उसे भगवान का आशीर्वाद मिले। कोई रोना मत।” मां और अन्य परिजन भी गहरी उदासी में थे, लेकिन उन्होंने दर्द को सकारात्मक दिशा दी।

निधन के तुरंत बाद परिवार की सहमति से अंगदान की प्रक्रिया शुरू हुई। डॉक्टरों ने बताया कि हरीश के कॉर्निया से दो नेत्रहीनों को दृष्टि मिलेगी, जबकि हार्ट वाल्व से चार अन्य मरीजों को फायदा होगा। परिवार का कहना है कि हरीश जाते-जाते भी कई जिंदगियों को रोशनी और जीवन दे गए। यह उनकी अंतिम इच्छा और परिवार की मानव सेवा की भावना है।