इंदौर में 14 मौतें, 2400 से ज्यादा बीमार; मुआवजे के चेक लौटाकर बिलखते परिजनों ने पूछा- ‘साफ पानी कब मिलेगा?

देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से मचा हाहाकार थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को मौत का आंकड़ा बढ़कर 14 हो गया है, जब कुलकर्णी भट्टा निवासी 43 वर्षीय अरविंद ने दम तोड़ दिया। 21 दिसंबर से शुरू हुआ मौतों का यह सिलसिला नए साल के पहले दिन भी जारी है, जिसने शहर के ड्रेनेज और वॉटर सप्लाई सिस्टम की कलई खोलकर रख दी है।

त्रासदी के आंकड़े: घर-घर में पसरा मातम

स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए व्यापक सर्वे में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं:  अब तक 7,992 घरों की जांच की गई।कुल 2,456 लोग संक्रमित या संदिग्ध पाए गए हैं। 162 मरीजों का अभी भी विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है, जबकि 200 से अधिक लोग भर्ती किए गए थे।

‘चेक नहीं समाधान चाहिए’: मंत्री विजयवर्गीय का विरोध

गुरुवार सुबह कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय जब स्कूटर पर सवार होकर पीड़ितों के बीच पहुंचे, तो उन्हें भारी जन-आक्रोश का सामना करना पड़ा। सरकार ने 7 मृतक परिवारों को 2-2 लाख रुपये के मुआवजे के चेक दिए, लेकिन परिजनों ने यह कहते हुए चेक लेने से मना कर दिया कि उन्हें पैसा नहीं, बल्कि जीने के लिए साफ पानी चाहिए।

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें स्थानीय महिलाएं मंत्री को खरी-खोटी सुना रही हैं। महिलाओं का आरोप है कि पिछले दो साल से इलाके में गंदा पानी आ रहा है, जिसकी शिकायत पार्षद से कई बार की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसी वीडियो को लेकर पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने सरकार पर ‘सत्ता के अहंकार’ में डूबे होने का आरोप लगाया है।

हाईकोर्ट सख्त: ‘फ्री इलाज तो करना ही पड़ेगा’

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने मामले में दायर दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने आदेश दिए हैं: सरकार को 2 जनवरी तक विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी। कोर्ट ने दो टूक कहा कि सभी मरीजों का मुफ्त इलाज सुनिश्चित किया जाए।

सीएम की बैठक और मंत्री का ‘विवादित’ बयान

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में आपात बैठक कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। हालांकि, बैठक के बाद मीडिया के सवालों पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अपना आपा खो बैठे। इलाज के खर्च के रिफंड से जुड़े सवाल पर उन्होंने अपशब्दों का प्रयोग किया, जिसके लिए बाद में उन्होंने ‘X’ (ट्विटर) पर खेद भी जताया।

कांग्रेस की जांच समिति और भोपाल में अलर्ट

विपक्ष ने इस मामले को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार की है। कांग्रेस ने पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा और जयवर्धन सिंह सहित 5 सदस्यीय जांच समिति बनाई है। वहीं, इंदौर की घटना से सबक लेते हुए भोपाल नगर निगम भी अलर्ट मोड पर आ गया है। महापौर मालती राय के निर्देश पर टीमें अवधपुरी जैसे इलाकों में पानी के सैंपल ले रही हैं ताकि इंदौर जैसी स्थिति की पुनरावृत्ति न हो।