भारतीय शेयर बाजार ने अमेरिकी बाजारों की मजबूती का सकारात्मक असर दिखाया। हफ्ते के अंतिम ट्रेडिंग सत्र में घरेलू बाजार मजबूती के साथ खुले। खासकर आईटी सेक्टर के प्रमुख शेयरों में जबरदस्त खरीदारी देखी गई, जिसने बाजार को शुरुआती कारोबार में मजबूत आधार प्रदान किया।
आईटी सेक्टर की प्रमुख कंपनी इन्फोसिस के शेयरों में शुरुआती सत्र में लगभग 5 प्रतिशत तक की उछाल दर्ज हुई। इन्फोसिस की अगुआई में टीसीएस, विप्रो, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा जैसे अन्य आईटी स्टॉक्स में भी अच्छी खरीदारी हुई। अमेरिकी बाजारों में टेक और बैंकिंग शेयरों की तेजी तथा वैश्विक स्तर पर मिले सकारात्मक संकेतों ने आईटी सेक्टर को खास फायदा पहुंचाया।
बीएसई सेंसेक्स (30 शेयरों वाला सूचकांक) मजबूत बढ़त के साथ 83,670 अंक के आसपास खुला और जल्द ही 83,700 के स्तर को पार कर गया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 200-600 अंकों की बढ़त के साथ ट्रेड कर रहा था, जिसमें बैंकिंग और आईटी शेयरों की मजबूत खरीदारी मुख्य भूमिका निभा रही थी।
इसी तरह निफ्टी-50 भी हरे निशान में खुला। निफ्टी ने 25,696 अंक से कारोबार शुरू किया और जल्द ही 25,700 के पार पहुंच गया। सुबह के सत्र में निफ्टी 60-180 अंकों की बढ़त के साथ 25,700-25,850 के बीच ट्रेड कर रहा था।
गौरतलब है कि गुरुवार को महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों के कारण शेयर बाजार बंद रहा था, जिसके चलते बुधवार के बाद यह पहला ट्रेडिंग दिन था।
अमेरिकी बाजारों का प्रदर्शन
गुरुवार को अमेरिकी शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुए। टेक्नोलॉजी और बैंकिंग सेक्टर में आई तेजी के दम पर प्रमुख सूचकांक ऊपर बंद हुए। डाउ जोंस में 0.6% की बढ़त देखी गई, जबकि एसएंडपी 500 0.26% और नैस्डैक 0.25% चढ़कर बंद हुए। मजबूत श्रम बाजार के आंकड़ों ने भी बाजार की धारणा को सहारा दिया। 10 जनवरी को समाप्त सप्ताह में साप्ताहिक बेरोजगारी दावे 1.98 लाख रहे, जो अर्थशास्त्रियों के अनुमान (2.15 लाख) से काफी बेहतर थे।
एशियाई बाजारों का रुख
शुक्रवार को एशियाई बाजारों में मिला-जुला प्रदर्शन देखा गया। चीन का सीएसआई 300 और हांगकांग का हैंग सेंग 0.5% से अधिक ऊपर चढ़े। वहीं जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी हल्की गिरावट में रहे।
सेमीकंडक्टर सेक्टर पर निवेशकों की खास नजर रही, क्योंकि अमेरिका और ताइवान के बीच हुए महत्वपूर्ण व्यापार समझौते के तहत ताइवानी चिप कंपनियों ने अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में कम से कम 250 अरब डॉलर निवेश करने पर सहमति जताई है। बदले में उन्हें टैरिफ में छूट मिलेगी, जिससे क्षेत्रीय चिप स्टॉक्स में सकारात्मक माहौल बना।