खालिद जमील बने भारतीय फुटबॉल टीम के नए कोच, 13 साल बाद किसी भारतीय को मिली यह जिम्मेदारी

भारतीय फुटबॉल के इतिहास में एक ऐतिहासिक मोड़ आया है। अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) ने खालिद जमील को भारतीय पुरुष फुटबॉल टीम का नया मुख्य कोच नियुक्त किया है। यह फैसला शुक्रवार को आयोजित एआईएफएफ की कार्यकारी समिति की बैठक में लिया गया, जहां 170 उम्मीदवारों की सूची में से खालिद को यह जिम्मेदारी सौंपी गई।

यह नियुक्ति इसलिए भी खास बन गई है क्योंकि पिछले तेरह वर्षों में पहली बार किसी भारतीय को यह अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे पहले 2011-12 में सावियो मेडेइरा ने यह पद संभाला था।

भारतीय कोच के रूप में खालिद की वापसी

खालिद जमील इस समय इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) की टीम जमशेदपुर एफसी के कोच हैं। वे लंबे समय से भारतीय फुटबॉल में एक महत्वपूर्ण नाम बने हुए हैं। 48 वर्षीय खालिद का जन्म कुवैत में हुआ था, लेकिन उनका पूरा फुटबॉल करियर भारत में ही विकसित हुआ। एक खिलाड़ी के तौर पर उन्होंने महिंद्रा यूनाइटेड, एयर इंडिया एफसी और मुंबई एफसी जैसी टीमों का प्रतिनिधित्व किया।

साल 2009 में चोटों के चलते खालिद को मैदान से संन्यास लेना पड़ा, लेकिन उन्होंने कोचिंग की दुनिया में कदम रखते हुए नए मुकाम हासिल किए। 2017 में उन्होंने आईजॉल एफसी को आई-लीग का खिताब जिताकर इतिहास रच दिया। यह पहली बार था जब उत्तर-पूर्व की किसी टीम ने यह खिताब जीता और इसमें खालिद की रणनीति का बड़ा योगदान रहा।

कोचिंग में उल्लेखनीय सफर और उपलब्धियां

खालिद जमील ने बाद में नॉर्थईस्ट यूनाइटेड एफसी और फिर जमशेदपुर एफसी जैसे आईएसएल क्लबों को कोचिंग दी। युवा खिलाड़ियों को तराशने और टीमों को रणनीतिक मजबूती देने की उनकी शैली ने उन्हें भारतीय फुटबॉल में एक विशिष्ट पहचान दी है।

मई 2025 में उन्हें लगातार दूसरे साल “AIFF मेन्स कोच ऑफ द ईयर” का सम्मान मिला, जो उनकी कोचिंग की गुणवत्ता का प्रमाण है। 2023-24 के आईएसएल सीजन में जमशेदपुर एफसी को सेमीफाइनल तक पहुंचाने में भी उनकी अहम भूमिका रही। इसके साथ ही कलिंगा सुपर कप के फाइनल और एएफसी चैंपियंस लीग क्वालिफिकेशन में टीम के संघर्ष ने उनकी सफलता की कहानी को और मजबूत किया।

जमशेदपुर एफसी और खालिद का रिश्ता

खालिद की नियुक्ति का असर सिर्फ राष्ट्रीय टीम तक सीमित नहीं है। जमशेदपुर एफसी के लिए भी यह गौरवपूर्ण पल है। टाटा स्टील के स्वामित्व वाली यह टीम 2017 में अस्तित्व में आई थी और अपने पहले कोच स्टीव कोपेल के नेतृत्व में मैदान में उतरी थी। खालिद के नेतृत्व में यह क्लब नई ऊंचाइयों को छूने लगा।

2023-24 सीजन में त्रिभुवन आर्मी एफसी के खिलाफ डूरंड कप के उद्घाटन मैच में 3-2 की जीत में खालिद ने पूरी तरह भारतीय खिलाड़ियों की टीम मैदान में उतारी। इस मैच में सार्थक गोलुई, मनवीर सिंह और निकिल बरला जैसे युवा खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। यह खालिद की रणनीति और भारतीय प्रतिभाओं पर भरोसे का प्रमाण था।

सीएएफए कप में खालिद की पहली परीक्षा

भारतीय फुटबॉल टीम के कोच के तौर पर खालिद की पहली चुनौती अगस्त 2025 में होगी, जब मध्य एशियाई फुटबॉल संघ (CAFA) नेशंस कप का आयोजन ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान में किया जाएगा। भारत को ग्रुप बी में ताजिकिस्तान, ईरान और अफगानिस्तान के साथ रखा गया है। टीम का पहला मुकाबला 29 अगस्त को ताजिकिस्तान से होगा, उसके बाद 1 सितंबर को ईरान और 4 सितंबर को अफगानिस्तान के खिलाफ मैच खेले जाएंगे। टूर्नामेंट का फाइनल 8 सितंबर को होगा।

एआईएफएफ की रणनीति और चयन प्रक्रिया

AIFF की तकनीकी समिति, जिसकी अध्यक्षता पूर्व स्टार स्ट्राइकर आईएम विजयन कर रहे हैं, ने खालिद को विदेशी उम्मीदवारों जैसे स्टीफन टारकोविक और स्टीफन कोंस्टेनटाइन से ऊपर तरजीह दी। इस चयन ने न केवल खालिद की क्षमता को मान्यता दी, बल्कि एक स्वदेशी कोच को प्राथमिकता देने की नीति को भी मजबूती दी। माना जा रहा है कि यह निर्णय आंशिक रूप से AIFF की मौजूदा वित्तीय सीमाओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया।

प्रशंसकों और विशेषज्ञों की नजरें

खालिद जमील की नियुक्ति को लेकर फुटबॉल विशेषज्ञों और फैंस के बीच उत्साह का माहौल है। कई लोगों का मानना है कि यह भारतीय फुटबॉल के लिए एक नई शुरुआत है। हाल के वर्षों में भारतीय टीम का प्रदर्शन अस्थिर रहा है और पूर्व कोच मनोलो मार्केज के जाने के बाद टीम को एक ठोस मार्गदर्शन की जरूरत थी। खालिद की योजनात्मक सोच और अनुशासनात्मक दृष्टिकोण के जरिए टीम में नई जान आने की उम्मीद जताई जा रही है।